नवरात्र मे मां दुर्गा का आठवां स्वरूपः महागौरी

By Shobhna Jain | Posted on 20th Oct 2015 | देश
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नई दिल्ली २० अक्टूबर( वीएनआई) नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर बहुत ही विधि-विधान से माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। आज आठवीं देवी महागौरी की आराधना का दिन है| यह अमोघ फलदायिनी हैं और भक्तों के तमाम कल्मष धुल जाते हैं। पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है क्योंकि पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। उनका रूप गौर वर्ण का हो गया अतः उज्जवल स्वरूप की महागौरी को अन्नपूर्णा, ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी, त्रैलोक्यपूज्या और शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली महागौरी का नाम दिया गया है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है।इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। उत्पत्ति के समय इनकी आयु आठ साल की होने के कारण नवरात्र के आठवें दिन इनकी पूजा की जाती है। अपने भक्तों के लिए यह अन्नपूर्णा स्वरूप हैं। इनके भक्त अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन और सम्मान करते हुए महागौरी की कृपा प्राप्त करते हैं। यह धन वैभव और सुख शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। सांसारिक रूप में इनका स्वरूप बहुत ही उज्जवल, कोमल, श्वेत वस्त्रधारी चतुर्भुज युक्त, एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में डमरू लिए हुए है। यह देवी सफेद वृषभ यानी बैल पर सवार हैं।इनकी 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए इनको वृषारूढ़ा भी कहा गया है। महागौरी का ध्यान मंत्रः श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया॥

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