नई दिल्ली (वीएनआई ) 12जुलाई उत्तर भारत में मानसून की चाल एक बार फिर सुस्त पड़ गई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के कई हिस्सों और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक वर्षा नहीं होने से लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। दिन के तापमान में भले बहुत अधिक बढ़ोतरी न हो, लेकिन हवा में नमी बढ़ने से मौसम बेहद असहज बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसूनी प्रणाली के कमजोर पड़ने और अनुकूल निम्न दबाव तंत्र विकसित नहीं होने के कारण बारिश की गतिविधियां फिलहाल धीमी हैं।
मानसून में यह ठहराव किसानों की चिंता भी बढ़ा रहा है। खरीफ फसलों की बुआई कई क्षेत्रों में बारिश पर निर्भर है और वर्षा में देरी से खेतों में नमी की कमी महसूस की जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। हालांकि जिन क्षेत्रों में पहले अच्छी बारिश हो चुकी है, वहां फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है।
दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के अनेक शहरों में सुबह और शाम बादलों की आवाजाही के बावजूद अपेक्षित वर्षा नहीं हो रही है। इसके कारण उमस लगातार बनी हुई है और बिजली की मांग भी बढ़ रही है। लोग मानसून की झमाझम बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो गर्मी से राहत देने के साथ-साथ जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है, जबकि जहां अनुकूल मौसम तंत्र सक्रिय होंगे वहां तेज बारिश भी देखने को मिल सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में ऐसे छोटे-छोटे विराम सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन लंबे समय तक बारिश का अभाव कृषि, जल संसाधनों और जनजीवन पर असर डाल सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें अब मानसून की अगली सक्रिय लहर पर टिकी हैं।
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