नई दिल्ली (वीएनआई) 1 अगस्त कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में तीन और पदक डाल दिए। शनिवार (1 अगस्त) को ग्लासगो के बॉक्सिंग एरिना में भारत की महिला मुक्केबाज प्रीति पवार और जैसमीन लांबोरिया ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा बुलंद किया, जबकि पुरुष वर्ग में जादुमणि सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। इन उपलब्धियों ने भारत के पदक अभियान को नई मजबूती प्रदान की और एक बार फिर भारतीय मुक्केबाजी की बढ़ती ताकत का परिचय दिया।
महाराष्ट्र की प्रतिभाशाली मुक्केबाज प्रीति पवार ने महिला 54 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक जीता। शुरुआत से ही उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाया और तेज़ पंचों तथा बेहतरीन फुटवर्क के दम पर मुकाबले पर अपना दबदबा बनाए रखा। निर्णायकों ने सर्वसम्मति से उन्हें विजेता घोषित किया। प्रीति पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला मुक्केबाजी की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल होकर उभरी हैं। उन्होंने 2025 विश्व बॉक्सिंग कप में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
इसके बाद महिला 57 किलोग्राम वर्ग में जैसमीन लांबोरिया ने भी शानदार प्रदर्शन किया। हरियाणा के भिवानी की रहने वाली जैसमीन ने उत्तरी आयरलैंड की अनुभवी मुक्केबाज माइकेला वॉल्श को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। जैसमीन ने पूरे मुकाबले में संयम, आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का बेहतरीन संतुलन दिखाया। 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स की कांस्य पदक विजेता जैसमीन ने पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और 2025 विश्व बॉक्सिंग कप में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की थी। ग्लासगो में उनकी यह जीत भारतीय महिला मुक्केबाजी के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग में जादुमणि सिंह ने भी पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। मणिपुर के इस युवा मुक्केबाज ने दमदार खेल दिखाते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि स्वर्ण पदक मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने रजत पदक जीतकर भारत का सम्मान बढ़ाया। जादुमणि पहले भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं और 2025 विश्व बॉक्सिंग कप में रजत पदक जीत चुके हैं। उनका प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारतीय पुरुष मुक्केबाजी का भविष्य भी मजबूत हाथों में है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में मुक्केबाजी के बढ़ते स्तर, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का भी परिणाम है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बॉक्सरों ने ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार सफलता हासिल की है। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारतीय मुक्केबाज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दुनिया के सामने अपनी ताकत का परिचय दे रहे हैं।
प्रीति पवार और जैसमीन लांबोरिया के स्वर्ण तथा जादुमणि सिंह के रजत पदक ने भारतीय दल के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। खेल प्रेमियों की निगाहें अब प्रतियोगिता के बाकी मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां भारतीय खिलाड़ी पदकों की संख्या बढ़ाने और देश का गौरव और ऊंचा करने के इरादे से मैदान में उतरेंगे। भारतीय मुक्केबाजों की यह सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी है, जो आने वाले वर्षों में देश को और अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिलाने का सपना देख रहे हैं।
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