तीन भारतीय किशोरों ने इमली के बीजों से बनाया माइक्रोप्लास्टिक फिल्टर, जीता ‘द अर्थ प्राइज 2026’

By VNI India | Posted on 3rd Jun 2026 | VNI स्पेशल
द अर्थ प्राइज 202

नई दिल्ली, 3 जून, (वीएनआई) भारत के तीन युवा छात्रों ने अपनी अभिनव सोच और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के बल पर विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। विवान छावछारिया, एरियाना अग्रवाल और अव्याना मेहता को उनके अनूठे आविष्कार ‘प्लास-स्टिक’ के लिए प्रतिष्ठित The Earth Prize 2026 का वैश्विक विजेता घोषित किया गया है। यह पहली बार है जब भारत की किसी टीम ने यह सम्मान हासिल किया है।

इन किशोर वैज्ञानिकों ने इमली के बीजों के पाउडर से एक जैव-अपघटनीय (बायोडिग्रेडेबल) पदार्थ विकसित किया है, जो पानी में मौजूद सूक्ष्म प्लास्टिक कणों यानी माइक्रोप्लास्टिक्स को आकर्षित कर उन्हें एकत्र कर सकता है। ‘प्लास-स्टिक’ नामक यह तकनीक न केवल प्रभावी है, बल्कि कम लागत वाली और बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली भी है।

छात्रों के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक्स इतने छोटे होते हैं कि वे दिखाई नहीं देते, लेकिन पीने के पानी के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इमली के फेंके गए बीजों से तैयार विशेष पाउडर इन कणों को चुंबक की तरह अपनी ओर खींचता है। पानी में मिलाने पर प्लास्टिक कण छोटे-छोटे गुच्छों में बदल जाते हैं, जिन्हें चुंबकीय प्रक्रिया से बाहर निकाल लिया जाता है। इसके बाद एकत्रित प्लास्टिक को सुरक्षित रूप से टाइल्स और कोस्टर जैसी उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित किया जाता है, जिससे वह दोबारा पर्यावरण में न लौट सके।

इस  नवोन्मेषी विचार की प्रेरणा छात्रों को भारत के एक ग्रामीण क्षेत्र की यात्रा के दौरान मिली। वहां उन्होंने देखा कि लोग सामुदायिक प्लास्टिक कंटेनरों में पानी संग्रहित करते हैं और बिना किसी फिल्टर के उसका उपयोग करते हैं। एक बच्चे को ऐसा पानी पीते देखकर उन्हें माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण और उससे होने वाले संभावित स्वास्थ्य खतरों का एहसास हुआ। इसी चिंता ने उन्हें समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया।

विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थानीय संसाधनों पर आधारित है। भारत में इमली आसानी से ौर प्रचुर मात्रा मे उपलब्ध है, जिससे यह तकनीक ग्रामीण और संसाधन-वंचित क्षेत्रों में भी व्यवहारिक साबित हो सकती है। कम लागत और सरल प्रक्रिया इसे व्यापक स्तर पर अपनाने योग्य बनाती है।

वैश्विक सम्मान मिलने पर तीनों छात्र बहुत उत्साहित है, उन्होने कहा कि हजारों परियोजनाओं के बीच चुना जाना उनके लिए अविश्वसनीय और प्रेरणादायक अनुभव है। उनका मानना है कि यह उपलब्धि न केवल ‘प्लास-स्टिक’ को आगे बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि दुनिया भर के युवाओं को भी यह विश्वास दिलाएगी कि उनके विचार पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।

गौरतलब है कि वैश्विक विजेता का चयन सार्वजनिक मतदान के माध्यम से किया गया, जिसमें दुनिया भर से लगभग 23,000 लोगों ने भाग लिया। पर्यावरण और जलवायु संबंधी समाधानों को प्रोत्साहित करने वाला ‘द अर्थ प्राइज’ इस आविष्कार को इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण मानता है कि प्रकृति-आधारित सरल विचार भी जटिल प्रदूषण समस्याओं का समाधान बन सकते हैं।


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