अटलांटा/नई दिल्ली (वी एन आई )16 जुलाई, विश्व फुटबॉल के दो पुराने प्रतिद्वंद्वी जब मैदान पर उतरे तो करोड़ों प्रशंसकों की निगाहें अटलांटा के स्टेडियम पर टिकी थीं। अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच फीफा विश्व कप 2026 का सेमीफाइनल केवल एक मैच नहीं, बल्कि 24 वर्षों बाद विश्व कप में दोनों टीमों के बीच हुआ ऐतिहासिक मुकाबला था। वर्ष 2002 के बाद पहली बार दोनों टीमें विश्व कप में आमने-सामने थीं। ऐसे में रोमांच चरम पर था और खिलाड़ियों पर दबाव भी कम नहीं था। अंततः अनुभव, धैर्य और लियोनेल मेसी की अद्भुत सूझबूझ ने अर्जेंटीना को 2-1 की यादगार जीत दिलाकर लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचा दिया।
मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने तेज गति से खेल दिखाया। अर्जेंटीना ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा, जबकि इंग्लैंड ने अनुशासित रक्षापंक्ति के दम पर उसके अधिकांश हमलों को विफल कर दिया। इंग्लैंड के गोलकीपर ने कई बेहतरीन बचाव किए और पहले हाफ तक मुकाबला पूरी तरह संतुलित बना रहा।
दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने पलटवार का शानदार नमूना पेश किया। एंथनी गॉर्डन ने सटीक फिनिश के साथ गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाड़ी पूरे आत्मविश्वास के साथ खेलते नजर आए और ऐसा लगने लगा कि 1966 के बाद वह एक बार फिर विश्व कप फाइनल में पहुंच जाएगा।
लेकिन विश्व फुटबॉल के महान खिलाड़ियों में शामिल लियोनेल मेसी ने साबित कर दिया कि बड़े खिलाड़ी बड़े अवसरों पर ही अपनी पहचान छोड़ते हैं।
मैच का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट 86वें मिनट में आया। मेसी ने अपनी शानदार दृष्टि और सटीक पास से एंजो फर्नांडिस के लिए गोल का अवसर बनाया। फर्नांडिस ने बिना कोई गलती किए गेंद को जाल में पहुंचा दिया और अर्जेंटीना ने 1-1 की बराबरी कर ली। इस गोल ने मैच का पूरा रुख बदल दिया। इंग्लैंड का आत्मविश्वास डगमगाया, जबकि अर्जेंटीना का मनोबल कई गुना बढ़ गया।
इंजुरी टाइम में मेसी ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने बेहतरीन क्रॉस देकर लाउतारो मार्टिनेज को मौका बनाया और मार्टिनेज ने शानदार हेडर के जरिए विजयी गोल दाग दिया। अंतिम सीटी बजते ही अर्जेंटीना के खिलाड़ी और हजारों समर्थक खुशी से झूम उठे, जबकि इंग्लैंड के खिलाड़ियों की निराशा साफ दिखाई दे रही थी।
इस मुकाबले में मेसी भले ही गोल नहीं कर सके, लेकिन दोनों गोल कराने में उनकी निर्णायक भूमिका रही। उन्होंने दो शानदार असिस्ट देकर यह साबित किया कि उम्र केवल एक संख्या है। 39 वर्ष की आयु में भी उनकी फिटनेस, खेल को पढ़ने की क्षमता और निर्णायक पास देने की कला आज भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में उनकी पहचान बनाए हुए है।
इस जीत के साथ अर्जेंटीना लगातार दूसरे विश्व कप फाइनल में पहुंच गया है, जहां उसका मुकाबला स्पेन से होगा। दूसरी ओर इंग्लैंड अब तीसरे स्थान के लिए फ्रांस से भिड़ेगा।
गोल्डन बूट की दौड़ में भी लियोनेल मेसी सबसे आगे बने हुए हैं। उन्होंने अब तक टूर्नामेंट में आठ गोल किए हैं और चार गोल में असिस्ट दिया है। सर्वाधिक गोल करने की दौड़ में उनकी बढ़त कायम है। शानदार प्रदर्शन के कारण वे गोल्डन बॉल के भी सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। यदि फाइनल में भी उनका प्रदर्शन इसी तरह रहा और अर्जेंटीना खिताब जीतने में सफल रहा तो मेसी अपने करियर में एक और विश्व कप ट्रॉफी के साथ गोल्डन बूट और गोल्डन बॉल जैसी प्रतिष्ठित उपलब्धियां भी हासिल कर सकते हैं।
इस मुकाबले की कई यादगार तस्वीरें लंबे समय तक फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में रहेंगी—इंग्लैंड का शुरुआती दबदबा, गॉर्डन का गोल, अंतिम मिनटों में मेसी की दो जादुई असिस्ट, लाउतारो मार्टिनेज का विजयी हेडर और जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों का भावुक जश्न। यह मैच एक बार फिर साबित कर गया कि फुटबॉल में अंतिम सीटी बजने तक कुछ भी संभव है और महान खिलाड़ी वही होते हैं जो सबसे कठिन क्षणों में अपनी टीम को जीत दिलाने का रास्ता दिखाते है
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