नई दिल्ली (वीएनआई) 1 अगस्त स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। पुरुषों की एफ-57 शॉटपुट स्पर्धा में भारत के सोमन राणा ने स्वर्ण पदक और शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर देश को यादगार गोल्ड-सिल्वर फिनिश दिलाई। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में इस स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण और पहला एक-दो (वन-टू) फिनिश है, जिसने भारतीय पैरा एथलेटिक्स की नई ऊंचाइयों को दुनिया के सामने स्थापित कर दिया।
भारतीय सेना के हवलदार सोमन राणा की सफलता संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी है। वर्ष 2006 में नियंत्रण रेखा पर ड्यूटी के दौरान बारूदी सुरंग विस्फोट में उन्होंने अपना दाहिना पैर खो दिया था। इस कठिन हादसे के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और पैरा एथलेटिक्स को अपना लक्ष्य बनाया। लगातार कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। ग्लासगो में उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 13.40 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया और भारत का तिरंगा सर्वोच्च स्थान पर लहराया।
उत्तराखंड के शुभम जुयाल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 13.28 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और रजत पदक जीत लिया। उन्होंने पूरे मुकाबले में बेहतरीन निरंतरता दिखाई और अंत तक स्वर्ण पदक की कड़ी चुनौती पेश की। उनके प्रदर्शन ने साबित किया कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और देश के खिलाड़ी विश्व स्तर पर लगातार अपनी छाप छोड़ रहे हैं।
एक ही स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों का शीर्ष दो स्थानों पर रहना भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद गौरवपूर्ण क्षण रहा। सोमन राणा और शुभम जुयाल ने न केवल भारत के पदक अभियान को मजबूती दी, बल्कि यह भी दिखाया कि भारतीय पैरा खिलाड़ी अब बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। उनकी इस उपलब्धि ने देशभर के खेल प्रेमियों को गर्व का अवसर दिया और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का नया अध्याय लिखा।
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