नई दिल्ली (वीएनआई) 20 जुलाई फुटबॉल इतिहास में 19 जुलाई 2026 की रात हमेशा याद रखी जाएगी। 'न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम' में खेले गए फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में 'स्पेन' ने गत चैंपियन 'अर्जेंटीना' को अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत ने जहां स्पेन को दुनिया का नया फुटबॉल सम्राट बना दिया, वहीं दूसरी ओर 'लियोनेल मेसी' का शानदार विश्व कप सफर बेहद भावुक अंदाज में समाप्त हुआ। यह मेसी के करियर का आखिरी विश्व कप था और वह दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी उठाने से सिर्फ एक गोल दूर रह गए।
इस मुकाबले में पूरे 105 मिनट तक दोनों टीमों के बीच कोई भी गोल नहीं हुआ। अर्जेंटीना की मजबूत रक्षापंक्ति और स्पेन का आक्रामक खेल लगातार टकराता रहा। स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शक और दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल प्रेमी उस एक पल का इंतजार कर रहे थे, जो मैच का फैसला करेगा।
16 साल पहले भी एक्स्ट्रा टाइम ने तोड़ा था सपना: 'लियोनेल मेसी' के लिए यह हार इसलिए भी ज्यादा दर्दनाक रही क्योंकि लगभग 16 वर्ष पहले 2014 विश्व कप फाइनल में भी उनका सपना अतिरिक्त समय में ही टूटा था। उस समय 'जर्मनी' के 'मारियो गोट्जे' ने 113वें मिनट में गोल कर अर्जेंटीना को 1-0 से हराया था। मेसी की आंखों के सामने विश्व कप ट्रॉफी फिसल गई थी।
इसके बाद मेसी ने वर्षों तक संघर्ष किया। 2022 में उन्होंने अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाया और अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा किया। लेकिन 2026 में जब वह अपने आखिरी विश्व कप में उतरे, तो एक बार फिर अतिरिक्त समय का गोल उनके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बन गया। फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार गोल जर्मनी की जगह स्पेन ने किया।
39 वर्ष की उम्र में आखिरी विश्व कप: 39 वर्षीय 'लियोनेल मेसी' ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि 2026 उनका अंतिम विश्व कप होगा। इस टूर्नामेंट में भी उन्होंने साबित किया कि उम्र केवल एक संख्या है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण गोल किए, शानदार पास दिए और युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया। उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल तक पहुंचा।
फाइनल में भी मेसी ने कई बार आक्रमण की शुरुआत की, लेकिन स्पेन की अनुशासित रक्षापंक्ति ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। जैसे-जैसे समय बीतता गया, मैच और रोमांचक होता गया।
स्पेन की रणनीति और सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों ने बदला मैच: स्पेन के मुख्य कोच ने अतिरिक्त समय में अपने बेंच खिलाड़ियों पर भरोसा जताया और यही फैसला मैच का टर्निंग पॉइंट बन गया।
106वें मिनट में स्पेन के कप्तान 'लामिन यामाल' ने दाईं ओर तेजी से हमला शुरू कराया। उन्होंने गेंद 'पेड्रो पोरो' तक पहुंचाई। पोरो का शानदार क्रॉस बॉक्स में पहुंचा, जहां मैदान पर बतौर सब्स्टीट्यूट उतरे 'निको विलियम्स' ने समझदारी से गेंद को पीछे की ओर हेड किया। उसी समय दूसरे सब्स्टीट्यूट 'फेरान टोरेस' सही जगह पर मौजूद थे। उन्होंने बिना समय गंवाए बाएं पैर से जोरदार वॉली लगाई और गेंद सीधे गोलपोस्ट की छत में जा समाई।
106वें मिनट का यह गोल ही विश्व कप 2026 का निर्णायक क्षण साबित हुआ। पूरे स्टेडियम में स्पेनिश समर्थकों का जश्न शुरू हो गया, जबकि अर्जेंटीना के खिलाड़ी और प्रशंसक स्तब्ध रह गए।
'लामिन यामाल' ने कप्तान के रूप में निभाई बड़ी भूमिका: सिर्फ 19 वर्ष की उम्र में स्पेन की कप्तानी संभाल रहे 'लामिन यामाल' पूरे टूर्नामेंट में टीम की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे। उन्होंने लगातार अपनी गति, ड्रिब्लिंग और सटीक पासिंग से विरोधी टीमों को परेशान किया।
फाइनल में भले ही उनके नाम गोल दर्ज नहीं हुआ, लेकिन निर्णायक आक्रमण की शुरुआत उन्होंने ही की। उनके शांत नेतृत्व और मैच को पढ़ने की क्षमता ने स्पेन को सही समय पर बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण रहा कि उन्हें इस विश्व कप के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिना गया।
रोड्री ने जीता 'गोल्डन बॉल': स्पेन के मिडफील्ड स्टार और उपकप्तान 'रोड्री' पूरे टूर्नामेंट में टीम की रीढ़ बने रहे। उन्होंने रक्षा और आक्रमण के बीच बेहतरीन संतुलन बनाया। फाइनल में भी उन्होंने अर्जेंटीना के मिडफील्ड को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का सम्मान 'गोल्डन बॉल' प्रदान किया गया। यह सम्मान बताता है कि पूरे विश्व कप में उनका प्रभाव कितना महत्वपूर्ण रहा।
'किलियन एम्बाप्पे' बने 'गोल्डन बूट' विजेता: गोल्डन बूट की दौड़ में अर्जेंटीना के कप्तान 'लियोनेल मेसी' और फ्रांस के स्टार 'किलियन एम्बाप्पे' के बीच कड़ा मुकाबला था। मेसी फाइनल में गोल नहीं कर सके, जबकि एम्बाप्पे 10 गोल के साथ टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोरर बने और उन्होंने 'गोल्डन बूट' अपने नाम किया। मेसी आठ गोल के साथ इस सूची में दूसरे स्थान पर रहे।
स्पेन का ऐतिहासिक अभियान: स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में बेहद संतुलित और अनुशासित फुटबॉल खेला। टीम ने नॉकआउट चरण में लगातार मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराया। राउंड ऑफ 16 में 'पुर्तगाल', क्वार्टर फाइनल में 'बेल्जियम', सेमीफाइनल में 'फ्रांस' और फाइनल में 'अर्जेंटीना' को हराकर स्पेन ने साबित किया कि वह इस विश्व कप की सबसे मजबूत टीम थी।
भावुक विदाई के साथ अमर हुई 'मेसी' की विरासत: अंतिम सीटी बजते ही स्पेन के खिलाड़ी खुशी से झूम उठे, जबकि 'लियोनेल मेसी' कुछ क्षणों तक मैदान पर खामोश खड़े रहे। यह सिर्फ एक हार नहीं थी, बल्कि विश्व फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक के विश्व कप सफर का अंतिम अध्याय था।
हालांकि मेसी अपने आखिरी विश्व कप में ट्रॉफी नहीं जीत सके, लेकिन उनकी विरासत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाया, अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए और करोड़ों फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए अमर हो गए।
दूसरी ओर, 'स्पेन' ने नई पीढ़ी के सितारों 'लामिन यामाल', 'रोड्री', 'निको विलियम्स' और 'फेरान टोरेस' के दम पर दुनिया को यह संदेश दे दिया कि विश्व फुटबॉल में अब एक नया युग शुरू हो चुका है। 106वें मिनट का वह गोल आने वाले वर्षों तक फीफा विश्व कप इतिहास के सबसे यादगार पलों में गिना जाएगा।
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