नई दिल्ली, 20 अप्रैल, (वीएनआई) भारत और दक्षिण कोरिया के बीच हाल में हुई शिखर वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग के बीच हुई मुलाकात में 'चिप्स से लेकर शिप्स' तक 5 बड़े समझौते हुए।
सरकार के अनुसार इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य आपसी व्यापार को 2030 तक 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर पर ले जाना और डिजिटल भविष्य की नींव रखना है। वहीं दोनों नेताओं ने व्यापार, तकनीक और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों देशों ने आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए बड़ा लक्ष्य रखा है। इसके लिए 'इंडिया-कोरिया फाइनेंशियल फोरम' की शुरुआत की गई है। साथ ही, कोरियाई कंपनियों, विशेषकर छोटे उद्योगों को भारत में बढ़ावा देने के लिए खास 'कोरियाई इंडस्ट्रियल टाउनशिप' स्थापित की जाएंगी, जिससे निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। शिपबिल्डिंग , स्टील और पोर्ट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
वहीं इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि भारत की प्रतिभा और कोरिया की तकनीक मिलकर दुनिया के लिए बेहतरीन समाधान तैयार कर सकती है। इस सहयोग से भारत को 'सेमीकंडक्टर हब' बनाने के सपने को भी मजबूती मिलेगी। जबकि राष्ट्रपति ली ने भारत को वैश्विक दक्षिण का एक प्रमुख नेता बताया और कहा कि जहाज निर्माण और रणनीतिक उद्योगों में भारत-कोरिया की जोड़ी सबसे आदर्श साझेदार साबित हो सकती है, जिससे दोनों की समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी।
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