नई दिल्ली, 21 मार्च, (शोभना जैन/वीएनआई) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ “सीज़फायर नहीं करना चाहते।” उन्होंने पत्रकारों से कहा, “आप जानते हैं कि जब आप दूसरे पक्ष को पूरी तरह तबाह कर रहे हों, तब सीज़फायर नहीं करते।” ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने युद्ध में समर्थन न देने पर नाटो सहयोगियों को “कायर” बताया और पश्चिमी सैन्य गठबंधन को अमेरिका के बिना “कागजी शेर” करार दिया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह संघर्ष अब वैश्विक संकट का रूप ले चुका है, जिसका असर भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जो भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ना तय है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका सीधा असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ता है। इसके अलावा, रुपये पर दबाव, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश में कमी जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव और आपूर्ति बाधित होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत की आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है
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