राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित 'श्रीकांत' फिर चर्चा में, हौसले की कहानी ने जीता दिल

By VNI India | Posted on 19th Jul 2026 | मनोरंजन
shrikant

नई दिल्ली (वीएनआई ) 18 जुलाई  नेत्रहीन उद्योगपति 'श्रीकांत बोल्ला' के जीवन पर बनी फिल्म 'श्रीकांत' को '72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' में 'सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म' का सम्मान मिलने के बाद यह एक बार फिर सुर्खियों में है। यह फिल्म बताती है कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों और वह खुद पर भरोसा रखे, तो कोई भी मुश्किल उसके सपनों को पूरा करने से नहीं रोक सकती।

फिल्म का निर्देशन 'तुषार हीरानंदानी' ने किया है। इसमें 'राजकुमार राव' ने 'श्रीकांत बोल्ला' का किरदार निभाया है। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। फिल्म में 'ज्योतिका', 'अलाया एफ' और 'शरद केलकर' ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। सभी कलाकारों ने अपनी दमदार अदाकारी से कहानी को और प्रभावशाली बना दिया है।

यह फिल्म आंध्र प्रदेश के रहने वाले 'श्रीकांत बोल्ला' की सच्ची जिंदगी पर आधारित है। जन्म से नेत्रहीन होने के कारण उन्हें बचपन से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पढ़ाई के दौरान भी उनके सामने कई रुकावटें आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर हर मुश्किल को पीछे छोड़ दिया।

बाद में 'श्रीकांत बोल्ला' ने विदेश में उच्च शिक्षा हासिल की और भारत लौटकर 'बोलैंट इंडस्ट्रीज़' की स्थापना की। उनकी कंपनी पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाती है और बड़ी संख्या में दिव्यांग लोगों को रोजगार भी देती है। आज उन्हें देश के सफल उद्योगपतियों और प्रेरणादायक सामाजिक उद्यमियों में गिना जाता है।

फिल्म का सबसे बड़ा संदेश यह है कि किसी भी व्यक्ति की शारीरिक कमी उसकी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। सही सोच, कड़ी मेहनत, परिवार का सहयोग और खुद पर विश्वास हो तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है।

'श्रीकांत' सिर्फ एक बायोपिक नहीं, बल्कि उम्मीद, संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है। यह फिल्म समाज को यह संदेश देती है कि नेत्रहीन या किसी भी तरह के दिव्यांग लोग किसी से कम नहीं हैं। उन्हें केवल अवसर और भरोसे की जरूरत होती है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद 'श्रीकांत' को फिर से लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि हर उम्र के लोगों को प्रेरित करती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है।


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