72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान: 'ममूटी' और 'कार्तिक आर्यन' बने संयुक्त सर्वश

By VNI India | Posted on 19th Jul 2026 | मनोरंजन
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नई दिल्ली (वीएनआई ) 18 जुलाई.भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल '72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों' की घोषणा कर दी गई है। इस वर्ष भी हिंदी, मलयालम, तमिल, तेलुगु सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं की फिल्मों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। अभिनय, निर्देशन, लेखन, संगीत, छायांकन, संपादन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों और फिल्मकारों को सम्मानित किया गया। पुरस्कारों में इस बार विषय प्रधान फिल्मों, उत्कृष्ट अभिनय और तकनीकी गुणवत्ता को विशेष महत्व मिला।

इस बार सबसे अधिक चर्चा 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' श्रेणी की रही। यह सम्मान संयुक्त रूप से मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता 'ममूटी' और बॉलीवुड अभिनेता 'कार्तिक आर्यन' को मिला। 'ममूटी' को उनकी चर्चित मलयालम फिल्म 'ब्रमायुगम' के लिए सम्मानित किया गया। पूरी तरह ब्लैक एंड व्हाइट'  में बनी इस फिल्म ने अपने रहस्यमय माहौल, लोककथाओं से प्रेरित कथानक, शानदार सिनेमैटोग्राफी और प्रभावशाली प्रस्तुति के कारण दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। फिल्म में 'ममूटी' ने एक रहस्यमयी सामंती जमींदार की भूमिका निभाई, जिसे उनके करियर के सबसे यादगार अभिनय में से एक माना जा रहा है।

करीब चार दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर में 'ममूटी' 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। मलयालम सिनेमा के साथ-साथ उन्होंने तमिल, तेलुगु, हिंदी और कन्नड़ फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। वे अपने सशक्त संवाद, गंभीर अभिनय, हर किरदार में पूरी तरह ढल जाने की क्षमता और लगातार नए प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं। 'ब्रमायुगम' के लिए मिला यह सम्मान उनके शानदार करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

वहीं 'कार्तिक आर्यन' को फिल्म 'चंदू चैंपियन' में भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता 'मुरलीकांत पेटकर' की भूमिका निभाने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इस किरदार के लिए उन्होंने कठिन शारीरिक प्रशिक्षण लिया और अपने अभिनय से संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की कहानी को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा। यह सम्मान उनके अभिनय करियर का अब तक का सबसे बड़ा सम्मान माना जा रहा है।

'सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री' का राष्ट्रीय पुरस्कार 'यामी गौतम' को फिल्म 'आर्टिकल 370' में उनके दमदार अभिनय के लिए दिया गया। फिल्म में उन्होंने एक खुफिया अधिकारी की भूमिका निभाई, जिसने अपनी सूझबूझ, साहस और जिम्मेदारी के साथ एक महत्वपूर्ण मिशन को अंजाम दिया। उनके संयमित और प्रभावशाली अभिनय की व्यापक सराहना हुई।

फिल्मों की श्रेणी में 'आर्टिकल 370' को 'सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म' का सम्मान मिला। राष्ट्रीय महत्व के विषय पर आधारित इस फिल्म को उसकी सशक्त कहानी, प्रभावी निर्देशन और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए सराहा गया। वहीं नेत्र हीन उद्योगपति 'श्रीकांत बोला' के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित फिल्म 'श्रीकांत' को 'सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म' का पुरस्कार मिला। यह फिल्म बताती है कि आत्मविश्वास, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर किसी भी चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल अभिनय तक सीमित नहीं हैं। इन पुरस्कारों के माध्यम से निर्देशन, पटकथा, संगीत, पार्श्व गायन, छायांकन, ध्वनि, संपादन, कला निर्देशन, वेशभूषा, मेकअप, गैर-फीचर फिल्मों और विभिन्न भारतीय भाषाओं की उत्कृष्ट फिल्मों को भी सम्मानित किया जाता है। यही कारण है कि इन्हें भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।

फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष के पुरस्कारों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारतीय सिनेमा में अब केवल व्यावसायिक सफलता ही नहीं, बल्कि दमदार कहानी, सामाजिक सरोकार, उत्कृष्ट अभिनय और नए सिनेमाई प्रयोगों को भी समान महत्व दिया जा रहा है। क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों का लगातार बढ़ता प्रभाव भारतीय सिनेमा की समृद्ध रचनात्मक परंपरा और वैश्विक पहचान को और मजबूत बना रहा है।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि उत्कृष्ट सिनेमा भाषा की सीमाओं से परे होता है। 'ब्रमायुगम', 'चंदू चैंपियन', 'आर्टिकल 370' और 'श्रीकांत' जैसी फिल्मों को मिला सम्मान इस बात का प्रमाण है कि अच्छी कहानी, बेहतरीन अभिनय और सार्थक विषयवस्तु ही किसी फिल्म को लंबे समय तक यादगार बनाती है।


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