10 जून नेत्रदान दिवस - आपकी आंखें बन सकती हैं किसी की दुनिया

By Shobhna Jain | Posted on 10th Jun 2026 | VNI स्पेशल
नेत्रदान दिवस

कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति वर्षों से अंधकार में जीवन बिता रहा हो और अचानक उसे दुनिया के रंग, अपने प्रियजनों के चेहरे, प्रकृति की सुंदरता और जीवन की अनगिनत खुशियां देखने का अवसर मिल जाए। यह चमत्कार किसी महंगी दवा या जटिल तकनीक से नहीं, बल्कि एक सामान्य व्यक्ति के नेत्रदान से संभव हो सकता है। यही कारण है कि नेत्रदान को महादान कहा जाता है।

भारत में प्रतिवर्ष 10 जून को नेत्रदान दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है और मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। देश में लाखों लोग कॉर्निया संबंधी बीमारियों के कारण दृष्टिहीनता का सामना कर रहे हैं। इनमें से अनेक लोगों की दृष्टि कॉर्निया प्रत्यारोपण के माध्यम से वापस लाई जा सकती है, लेकिन दान में मिलने वाले कॉर्निया की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

नेत्रदान की प्रक्रिया सरल और सुरक्षित है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद छह से आठ घंटे के भीतर आंखों के कॉर्निया को निकालकर संरक्षित किया जाता है। इससे मृतक के चेहरे की आकृति या सौंदर्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और अंतिम संस्कार की सभी धार्मिक परंपराएं सामान्य रूप से संपन्न की जा सकती हैं। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिल सकती है।

समाज में आज भी नेत्रदान को लेकर कई भ्रांतियां प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि बढ़ती उम्र, चश्मा लगना या मधुमेह जैसी बीमारियां नेत्रदान में बाधा हैं, जबकि अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता। नेत्रदान के लिए उम्र की कोई निश्चित सीमा नहीं है। अंतिम निर्णय चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद लिया जाता है।

भारतीय संस्कृति में दान को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जैन दर्शन में भी करुणा, परोपकार और जीवों के कल्याण की भावना को अत्यंत महत्व दिया गया है। नेत्रदान इन मूल्यों की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति है, क्योंकि इससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को केवल दृष्टि ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और जीवन जीने का नया अवसर मिलता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वयं नेत्रदान का संकल्प लें और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके बारे में जानकारी दें। मृत्यु के बाद हमारी आंखें भले ही हमारे किसी काम न आएं, लेकिन वे किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में प्रकाश का स्रोत बन सकती हैं। नेत्रदान दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जीवन का सबसे बड़ा उपहार वही है जो हम दूसरों के लिए छोड़ जाएं। सचमुच, आपकी आंखें किसी की दुनिया बदल सकती हैं और किसी के जीवन में हमेशा के लिए उजाला भर सकती हैं।


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