नई दिल्ली, 25 मार्च, (वीएनआई) नवरात्रि के सांतवें दिन आज आज देवी दुर्गा के सातवें रूप मां कालरात्रि की पूजा होती है। मां कालरात्रि की पूजा करने से बुरी शक्तियों और अकाल मृत्यु के भय से बचाव होता है। साथ ही, व्रती के जीवन में सुख-शांति आने लगती है।
माँ दुर्गा का सातवां रूप कालिका यानी काले रंग का है। मां कालरात्रि के विशाल केश हैं जो चारों दिशाओं में फैले हुए हैं। उनकी चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। देवी भगवान शिव के अर्ध्दनारीशवर रूप को दर्शाती हैं। माता की चार भुजाएं हैं जिनमें से खड्ग, कांटा और गले में माला मौजूद है। मां कालरात्रि के नेत्रों से अग्नि की वर्षा होती है। मां कालरात्रि को शुभंकरी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना करने से साधक को विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है। मां के इस स्वरूप से सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो सकती है।
मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद लाल या गहरे रंग के कपड़े पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। चौकी बिछाएं और मां की प्रतिमा या तस्वीर को लाल आसन पर स्थापित करें। माता को पूजा के दौरान गुड़हल के फूल, रोली, अक्षत, आदि अर्पित करें। भोग के रूप में मां को गुड या गुड़ से बने मालपुए का भोग लगाएं। सरसों के तेल या देसी घी का दीपक जलाएं। लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से मां कालरात्रि के मंत्रों का जप करें। अंत में कपूर जलाकर माता की आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटें।
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