नई दिल्ली (वीएनआई) 24 जून, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसी कड़ी में विकसित किया गया ‘आकाशतीर’ (Akashteer) आधुनिक युद्धक्षेत्र में भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला एक अत्याधुनिक स्वदेशी सिस्टम माना जा रहा है। यह केवल एक एयर डिफेंस सिस्टम नहीं, बल्कि एक ऐसा डिजिटल नेटवर्क है जो दुश्मन के हवाई खतरों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उन्हें निष्क्रिय करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज और सटीक बनाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार आकाशतीर एक स्वदेशी स्वचालित एयर डिफेंस कंट्रोल एंड रिपोर्टिंग सिस्टम (Air Defence Control and Reporting System) है, जिसे भारतीय सेना की वायु रक्षा इकाइयों के लिए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न रडारों, सेंसरों, संचार प्रणालियों और हथियार प्लेटफार्मों को एकीकृत कर वास्तविक समय में हवाई गतिविधियों की सटीक तस्वीर उपलब्ध कराना है। यह प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन, मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों का स्वतः पता लगाने और उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में
रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, इस परियोजना का विकास मुख्य रूप से Bharat Electronics Limited (BEL) ने किया है। इसके विकास में भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास तंत्र तथा अन्य स्वदेशी तकनीकी संस्थानों का भी योगदान रहा है। मार्च 2023 में रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद इसका उत्पादन और सेना में समावेशन तेज़ी से आगे बढ़ा।
आकाशतीर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वचालित निर्णय क्षमता है। पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों में जहां कई निर्णय मानव ऑपरेटरों द्वारा लिए जाते हैं, वहीं अकाशतीर विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर कम समय में कार्रवाई के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है। इससे प्रतिक्रिया समय में भारी कमी आती है और दुश्मन के हमलों का जवाब अधिक प्रभावी ढंग से दिया जा सकता है।
यह प्रणाली भारतीय सेना की वायु रक्षा इकाइयों को एक साझा और वास्तविक समय का एयर पिक्चर प्रदान करती है। इसके माध्यम से युद्धक्षेत्र में तैनात विभिन्न इकाइयों को एक जैसी और अद्यतन जानकारी मिलती है, जिससे समन्वय बेहतर होता है और मित्र सेनाओं पर गलती से हमला होने की संभावना कम हो जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, माइक्रो यूएवी और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में अकाशतीर जैसी प्रणाली भारतीय सेना को कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों की पहचान और निगरानी करने में बड़ी सहायता प्रदान करती है। यह प्रणाली विभिन्न रडारों और सेंसरों से प्राप्त आंकड़ों को जोड़कर एकीकृत स्थिति चित्र तैयार करती है, जिससे खतरे की पहचान अधिक सटीक हो जाती है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आकाशतीर ने हाल के संघर्षों और सैन्य अभियानों के दौरान अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। बताया गया कि इस प्रणाली ने ड्रोन, मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों की पहचान एवं निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क की क्षमता को मजबूत बनाया।
आकाशतीर की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी गतिशीलता है। यह वाहन आधारित प्रणाली है, जिसे आवश्यकता अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से तैनात किया जा सकता है। सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में इसकी तैनाती सेना को युद्धक्षेत्र में लचीलापन प्रदान करती है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अकाशतीर भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाता है कि देश अब केवल हथियारों का आयातक नहीं बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीकों का विकासकर्ता भी बन रहा है। स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह प्रणाली न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती है बल्कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को भी सशक्त बनाती है।
आज जब युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन तथा नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभा रही हैं, तब अकाशतीर भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है। यह प्रणाली केवल वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों का समाधान नहीं है, बल्कि भविष्य के युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई एक रणनीतिक तकनीक भी है। आकाशतीर भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और आधुनिक सैन्य सोच का सशक्त प्रतीक बन चुका है।
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