भारतीय आईटी सेक्टर, शेयरों में भारी गिरावट से मचा हड़कंप; एक्सेंचर के झटके से इंफोसिस, टीसीएस समेत दिग

By Shobhna Jain | Posted on 19th Jun 2026 | अर्थव्यवस्था
भारतीय आईटी सेक्ट

नई दिल्ली (वीएनआई)  19 जून,  भारतीय आईटी सेक्टर के लिए शुक्रवार का दिन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। अमेरिकी टेक दिग्गज एक्सेंचर के कमजोर कारोबारी संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार में आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली को जन्म दिया। एक्सेंचर द्वारा राजस्व वृद्धि के अनुमान घटाने के बाद उसके शेयर में करीब 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भी तेज बिकवाली देखने को मिली।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे बड़ा झटका इंफोसिस को लगा, जिसका शेयर करीब 8.5 प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा टीसीएस में 6.5 प्रतिशत से अधिक, टेक महिंद्रा में 7 प्रतिशत से ज्यादा, एम्फैसिस में लगभग 8 प्रतिशत, परसिस्टेंट सिस्टम्स में करीब 7 प्रतिशत, एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 6 प्रतिशत से अधिक तथा विप्रो में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इस व्यापक बिकवाली ने पूरे आईटी सेक्टर को दबाव में ला दिया।


यह गिरावट केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। भारत का आईटी और टेक्नोलॉजी क्षेत्र देश के सबसे बड़े रोजगार क्षेत्रों में से एक है, जहां 50 लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं। ऐसे में आईटी शेयरों में आई इस बड़ी गिरावट ने लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। नौकरी की सुरक्षा, वेतन वृद्धि, बोनस और भविष्य की भर्ती योजनाओं को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया है।


मीडिया मीडिया के हवा्ले से, इस संकट की जड़ अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता है। एक्सेंचर के प्रबंधन ने संकेत दिया है कि उसके ग्राहक नए प्रोजेक्ट्स और तकनीकी निवेश संबंधी फैसलों को टाल रहे हैं। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप से मिलने वाले प्रोजेक्ट्स पर निर्भर करता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर आई यह सुस्ती सीधे भारतीय कंपनियों के कारोबार को प्रभावित कर सकती है।


दुनिया की प्रमुख ब्रोकरेज कंपनियों ने भी आईटी सेक्टर को लेकर चिंता व्यक्त की है। मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि एक्सेंचर के नतीजे वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी कठिन परिस्थितियों का संकेत हैं। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार यह दबाव अगले कुछ तिमाहियों तक जारी रह सकता है और भारतीय आईटी कंपनियों के वित्त वर्ष 2027 के विकास अनुमान को भी प्रभावित कर सकता है।


एचएसबीसी का कहना है कि आईटी सेक्टर में मौजूदा कमजोरी का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल भारतीय आईटी कंपनियों के पास निकट भविष्य में तेज रिकवरी के लिए कोई बड़ा सकारात्मक कारक दिखाई नहीं देता।


वहीं जेफरीज ने चेतावनी दी है कि एक्सेंचर के कमजोर राजस्व अनुमान के बाद पूरे आईटी सेक्टर के विकास अनुमानों में कटौती की जा सकती है। कंपनी का मानना है कि आईटी सेवाओं की मांग अभी भी दबाव में है और भारतीय आईटी कंपनियों के वैल्यूएशन पर भी असर पड़ सकता है।


कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, एक्सेंचर के नतीजों ने पहले से दबाव झेल रहे आईटी सेक्टर की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। विशेष रूप से इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियों पर इसका अधिक असर पड़ सकता है क्योंकि वैश्विक ग्राहक अपने गैर-जरूरी तकनीकी खर्चों को फिलहाल रोक रहे हैं।


इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर कर्मचारियों पर पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक टेक उद्योग में बड़े पैमाने पर छंटनियां देखी गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि मांग में सुस्ती जारी रहती है तो कंपनियां अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए लागत कम करने के उपाय अपना सकती हैं। इससे कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।


वेतन वृद्धि और प्रदर्शन आधारित बोनस को लेकर भी आशंकाएं बढ़ गई हैं। जिन कर्मचारियों को इस वर्ष बेहतर इंक्रीमेंट की उम्मीद थी, उन्हें अब डर है कि कंपनियां कमजोर व्यावसायिक माहौल का हवाला देकर वेतन वृद्धि को सीमित कर सकती हैं। इसके अलावा फ्रेशर्स और नए इंजीनियरों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। जब कंपनियों को नए प्रोजेक्ट्स कम मिलते हैं तो वे भर्ती और ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया को टाल देती हैं, जिससे नए उम्मीदवारों के लिए अवसर कम हो जाते हैं।


हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी उद्योग की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत है। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के पास मजबूत नकदी भंडार, वैश्विक ग्राहक आधार और तकनीकी विशेषज्ञता मौजूद है। इसके बावजूद मौजूदा परिस्थितियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले कुछ महीने आसान नहीं होंगे।


ध्यान देने योग्य है कि आईटी उद्योग इस समय एक और बड़े बदलाव से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और नई डिजिटल तकनीकों के तेजी से विस्तार ने कार्य करने के तरीके को बदल दिया है। ऐसे में विशेषज्ञ कर्मचारियों को लगातार नई तकनीकों में खुद को प्रशिक्षित करने और कौशल बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। जो पेशेवर एआई, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड टेक्नोलॉजी जैसी उभरती तकनीकों में दक्षता हासिल करेंगे, उनके लिए अवसर अपेक्षाकृत बेहतर बने रह सकते हैं।


फिलहाल शेयर बाजार की यह बड़ी गिरावट केवल निवेशकों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय आईटी सेक्टर से जुड़े लाखों कर्मचारियों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और ग्राहकों का खर्च करने का रुख तय करेगा कि यह संकट अस्थायी साबित होता है या भारतीय आईटी उद्योग को लंबे समय तक इसकी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।


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