नई दिल्ली, 18 नवंबर, (वीएनआई) संसद के आज शुरू हुए शीतकालीन सत्र दौरान उच्च सदन राज्यसभा का यह 250वां सत्र है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कमजोर विपक्ष के वक्त उच्च सदन ने निरंकुशता नहीं आने दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपना भाषण शुरू करते हुए कहा, 250 सत्र का समय एक विचार यात्रा रही है। उच्च सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए अपने को ढालने का प्रयास किया। भारत की विकास यात्रा में निचले सदन से जमीन से जुड़ी चीजों का प्रतिबिंब झलकता है, तो उच्च सदन से दूर दृष्टि का अनुभव होता है। वहीं मोदी ने इस दौरान बीजद और एनसीपी सांसदों की वेल में ना आने को लेकर तारीफ भी की। प्रधानमंत्री ने कहा, अनुभव कहता है संविधान निर्माताओं ने जो व्यवस्था दी वो कितनी उपयुक्त रही है। कितना अच्छा योगदान इसने दिया है। जहां निचला सदन जमीन से जुड़ा है, तो उच्च सदन दूर तक देख सकता है। इस सदन के दो पहलू खास हैं- स्थायित्व और विविधता। स्थायित्व इसलिए महत्वपूर्ण है कि लोकसभा तो भंग होती रहती है लेकिन राज्य सभा कभी भंग नहीं होती और विविधता इसलिए महत्वपूर्ण है कि क्योंकि यहां राज्यों का प्रतिनिधित्व प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, पिछले 5 साल का समय देखें तो यही सदन है जिसने तीन तलाक का बिल पास करके महिला सशक्तिकरण का बहुत बड़ा काम किया। इसी सदन ने सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया, लेकिन कहीं विरोधभाव पैदा नहीं हुआ। सब जगह सहयोग का भाव बना।इसी सदन ने जीएसटी के रूप में वन नेशन-वन टैक्स की ओर समहति बनाकर देश को दिशा देने का काम किया है। देश की एकता और अखंडता के लिए अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने की शुरुआत पहले इसी सदन में हुई, उसके बाद लोकसभा में ये हुआ।
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