न्यूयार्क, 6 अप्रैल (वीएनआई) अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ के अनुसार भारत में करीब 6.1 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। इसके साथ ही यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2030 तक डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़कर 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी। वर्ष 2011 में करीब 9.83 लाख लोगों की मौत डायबिटीज से हुई थी। एक रिकॉर्ड के अनुसार हर सात सेकेंड में डायबिटीज से एक व्यक्ति की मौत होती है।
टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण शुरूआत में नहीं दिखाई देते हैं तथा समय के साथ- साथ बढ़ते रहते हैं। इसके शुरूआती लक्षण में व्यक्ति को अत्यधिक भूख और प्यास लगती है तथा वह बार-बार टॉयलेट जाता है। इसके अलावा जोड़ और मोड़ वाले स्थानों पर त्वचा पर दाग होना, यौन विकार और बार-बार संक्रमणों का होना इसके मुख्य लक्षण हैं। टाइप 2 डायबिटीज का कोई खास इलाज नही है, समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच करवाकर ही इससे बचा जा सकता है।
टाइप-2 मधुमेह के इलाज में बड़े पैमाने पर प्रयोग की जानेवाली इंजेक्टेबल दवाई के साथ खान-पान पर नियंत्रण और व्यायाम के जरिए स्वास्थ्य बेहतर किया जा सकता है।
अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए शोध में यह दावा किया गया है।
केलिफोर्निया स्थित न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिक रिसर्च स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक व प्रमुख शोधकर्ता केन फूजिका का कहना है, "तीन सालों तक लिराग्लुटाइट की 3.0 एमजी मात्रा के साथ इलाज, खानपान पर नियंत्रण और शारीरिक गतिविधियों में वृद्धि से ना सिर्फ लोगों का वजन घटता है, बल्कि टाइप 2 मधुमेह का खतरा भी कम होता है।" यह शोध अमेरिका बॉस्टन में आयोजित एंडोक्राइन सोसाइटी की सालाना बैठक एंडो 2016 में प्रस्तुत किया गया था।इंडो-एशियन न्यूज सर्विस के इनपुट के साथ