उज्जैन कुभंस्थ मे समाजिक बदलाव की बयार-पंडितों के साथ 'अछूत' महिलाओं ने किया स्नान

By Shobhna Jain | Posted on 14th May 2016 | देश
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उज्जैन,12 मई(मदन झा/वीएनआई)भोर की वेला, उज्जैन कुभंस्थ, पवित्र शिप्रा नदी का तट और वहा बहती ठंडी बयार के बीच मंत्रोच्चार और जयघोष के बीच डुबकियॉ लगाते साधु गण और अन्य श्रधालु...इसी माहौल मे भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के कुंभ महा पर्व पर दलित साधुओं सहित अन्य साधुओं के साथ पवित्र स्नान करने की सुर्खियो के बीच समाजिक समरसता, बदलाव की एक अनूठी खबर... यहां चल रहा सिंहस्थ कुंभ सदियों से जारी सामाजिक कुरीति के टूटने का गवाह बना, जब सैकड़ों साल से 'अछूत' मानी जाने वाली महिलाओं और वृंदावन से आईं विधवाओं ने यहां के रामघाट पर पंडितों के वेदमंत्रों के बीच्न/न केवल पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान किया,बल्कि उनके साथ पूजा अर्चना के बाद एक पंक्ति मे बैठ भोजन किया । स्नान के बाद इन महिलाओ के चेहरे पर आह्व्लाद और संतोष से दमक रहे थे. इन मे से एक महिला ने कहा" जब हम बचपन मे कुंभ स्नान कीमहिमा सुनते थे तो लगता था शायद अगले जन्म मे हम भी समाज के उस तबके मे जन्मे जहा वे बेरोक टोक इस पुण्य का लाभ उठा सकेंगे , लेकिन वह दिन इसीजन मे नसीब होगा सोचानही था" सामाजिक बदलाव की इस परंपरा को यहां डूबकी लगाने आए श्रद्धालुओं ने जमकर स्वागत किया । इस अनूठे और उत्प्रेरक कार्यक्रम के प्रेरक जाने- माने समाजसेवी और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ बिंदेश्वर पाठक रहे। डॉ पाठक ने इस कार्यक्रम को समाजिक समरसता का एक अनूठा उदाहरण बताते हुए कहा" इस तरह के कार्यक्रम निश्चय ही समाजिक सौहार्द का मजबूत स्तंभ होते है, जिससे समाज मे आपसी समझ बूझ बढती है जो देश की प्रगति मे अहम भूमिका निभाते है." उन्होने भी इन महिलाओं के साथ पवित्र स्नान किया। इसके बाद इन महिलाओं ने वेदपाठी पंडितों कै साथ भोजन भी किया। गौरतलब है कि राजस्थान के अलवर से आईं ये महिलाएँ साल 2003 के पहले तक सिर पर मैला ढोती थीं, लेकिन सुलभ इंटरनेशनल की मदद से इन्हे मैला साफ करने की अमानवीय कृत्य से मुक्ति दिलाई अब ये दूसरे सम्मानजनक काम करके न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हैं, बल्कि समाज में सिर उठाकर चल रही हैं। ऐसी ही कुछ स्थति वृंदावन से आईं विधवाो की रही थी.परिवारो द्वारा बेसहारा छोड़ दी गयी वे भी 2012 को पहले तक भीख मानकर गुजारा कर रहीं थीं, लेकिन अब सुलभ से मिल रही मासिक पेंशन और ट्रेनिंग के चलते वे भी सम्मानित जिंदगी गुजारा रही हैं । सुलभ के प्रयासों से अब ये विधवाएं होली- दीवाली भी उत्साह से मनातीं हैं जिन्हे अभी तक मनहूस समझ उनसे इन खुषियोका भी अधिकार छीन लिया गया था सुलभ इंटरनेशनल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को कामयाब बनाने की दिशा में भी अभियान चला रखा रखा है। इसके तहत स्कूलों में शौचालय बनाएं हैं । सुलभ सस्ती तकनीक वाले शौचालय विकसित करने के लिए दुनियाभर में मशहूर है।वी एन आ

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