आपकी सेहत डॉक्टर के हाथ मे नही ,आपके हाथ मे है

By Shobhna Jain | Posted on 27th Sep 2015 | देश
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नई दिल्ली,27 सितंबर (शोभनाजैन,वीएनआई) आपकी सेहत की कुंजी डॉक्टर के हाथ मे नही बल्कि आपके खुद के हाथ मे है, करना सिर्फ आपको इतना है कि स्वस्थ जीवन शैली अपनाये,नियमित् रूप से योग, ध्यान, व्यायाम करे, तनाव से दूर रहे, सही आहार विचार रखे और तंबाकु वगैरह के व्यसन से बचे. जाने माने ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ सुभाष सी मनचंदा ने आज यहा यह जानकारी देते हुए कहा कि इन तरीको से न/न केवल ह्रदय रोग, ब्लड प्रेशर, अस्थमा, मधुमेह बीमरियो से ही नही गंभीर बीमारियो से भी निबटा जा सकता है. राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ह्रदय रोग विभागाध्यक्ष रहे डॉ मनचंदा के अनुसार अनेक शोध से भी पता चला है कि योग और ध्यान से विशेष तौर पर दिल् की बीमारी पर अंकुश लगाने मे काफी लाभप्रद पाये गये है. उन्होने कहा कि दरअसल स्वस्थ रहने के मायने केवल बीमारी मुक्त् जीवन ही नही अपितु पूरी तरह से 'वेलनेस' य़ानि पूरी तरह से भला चंगा होना है जिसमे शरीर स्वस्थ हो, मन शांत व संतोष से परिपूर्ण हो ,यही वजह है कि इन दिनो सिर्फ बुद्धिमत्ता के पैमाने को ही बुद्धि का माप नही माना जा रहा है बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक पैमाना भी पूरी तरह से भला चंगा हो्ने का मापक माना गया है. डॉ मनचंदा आज यहा राष्ट्रीय एकता समिति द्वारा संचालित एन एम नगराज महाराज हॉलिस्टिक एवं वेलनेस सेन्टर का उदघाटन कर रहे थे. उन्होने कहा कि भारत मे अगले कुछ वर्षो मे दिल के रोगियो की संख्या दुगनी तथा मधुमेह रोगियो की संख्या तिगुनी होने की आशंका है जरूरत इस बात के है कि हम ऐसे तरीको से इन बीमारियो से समय रहते निजात पाये अथवा इन्हे नियंत्रण मे रखे. इन बीमारियो से निबटने के लिये एलोपेथी के साथ आयुर्वेद, होम्योपेथी जैसे तमाम परंपरागत चिकित्सा पद्धतियो को मिलाकर समग्र चिकित्सा पद्धति यानि 'हॉलिस्टिक तरीके' से ईलाज कर पाना बेहद कारगर पाया गया है.'हॉलिस्टिक'चिकित्सा पद्दति देश विदेश मे तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि जीवन शैली संबंधी बीमारियो का इस पद्धति से ईलाज करने से दवाओ के 'साईड एफेक्ट'का खतरा काफी कम रहता है, व्यायाम, मेडिटेशन, के जरिए तनाव को कम करने की कोशिश करें। इस अवसर पर प्रसिद्ध समाज सेवी एवं उद्द्योगपति रिखब चंद जैन एवं सामिति के उपाध्यक्ष पी आर मेहता ने घोषणा की कि अगला वर्ष आचार्य नगराज जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्षय मे विश्व बंधुत्व व राष्ट्रीय एकता के लिये विशिष्ट योगदान के लिये आचार्य नगराज राष्ट्रीय एकता पुरस्कार दिया जायेगा. सेंटर मे एलोपेथी के साथ, आयुर्वेद, होम्योपेथी चिकित्सा पद्धति के साथ प्रेक्षा ध्यान व अन्य योग शैलियो के साथ 'हास्य चिकित्सा पद्धति से हॉलिस्टिक चिकित्सा ्पद्धति से ईलाज किये जाने की व्यवस्था है. इस अवसर पर आचार्य नगराज के विद्वान शिष्य एवं दार्शनिक संत आचार्य मानमल जी ने एक शुभकामना संदेश मे कहा कि समग्र चिकित्सा पद्धति से जन साधारण को निश्चय ही बहुत लाभ होगा. आचार्य श्री अस्वस्थता की वजह से समारोह मे शामिल नही हो पाये समिति के अध्यक्ष सोहन लाल बाफना एवं सचिव चॉद रत्न दसाणी ने उम्मीद जाहिर की कि यह सेन्टर सुलभता से जन साधारण को बेहतर चिकित्सा सेवाये उपलब्ध करा सकेगा.गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में दिल के दौरे पड़ने के मामले में भारत दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे आगे है। वर्ष 2020 तक भारत में हृदय वाहिका रोग मौत और विकलांगता के सबसे प्रमुख कारण होंगे। दिल की बीमारियों से ग्रस्त लोगों की औसत उम्र घट रही है और इन दिनों युवाओ मे भी यह मामले बढ रहे है. समारोह मे आहार विशेषज्ञ डॉ आर कुमार ने कहा कि सही आहार व छोटी छोटी बाते अनेक रोगो से बचा सकती है, दूध के सेवन को स्वास्थय के लिये अस्वास्थकर बताते हुए उन्होने कहा कि सामान्य नमक की जगह अगर सेंधा नमक और चीनी के बजाय गुण का सेवन अच्छे स्वास्थय के रामबाण नुस्खे है. इस मौके पर गंगाराम अस्पताल की आयुर्वेदाचार्य प्रीति छाबड़ा ने भी कहा कि समग्र चिकित्सा से ्गंभीर बीमारियो का प्रभावी तरह से ईलाज हुआ है सुश्री छबड़ा ने बताया कि मेडिटेशन से सिर्फ शांति ही नहीं मिलती बल्कि व्यक्ति रिलैक्स महसूस करता है। इससे चिंता, गुस्सा, चिड़चिड़ापन दूर होता है और शरीर को भी आराम मिलता है।्हास्य थेरापिस्ट वरुणा खुल्लर ने कहा कि हास्य थेरपी और योग साधना विभिन्न रोगो से निबटने मे काफी कारगर रही. वी एन आई

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