अगरतला,७ मई त्रिपुरा (वी एन आई)में जिस मामले में घोर गरीबी से मजबूर महज 200 रुपयों के लिए एक माँ ्द्वारा अपने जिगर के टुकड़े को बेच देने का मामला सुर्खियो मे आया था ,उस महिला के पति यानि बच्चे के पिता ने इस मामले मे पूरा दोष मॉ पर डाल दिया है ,उसका कहना है का कहना है मैने मॉ को बहुत समझाया था बच्चे के पिता खानजॉय रियांग का कहना है "मैंने बच्चे को न बेचने के लिए बहुत जोर दिया लेकिन इसकी माँ ने 200 रुपयों के लिए इसे बेच ही डाला। गरीबी रेखा के नीचे आने वाली इस आदिवासी महिला पर आरोप है कि अपने बच्चे को उसने पिछले महीने की 13 अप्रैल को इसी राज्य के लक्ष्मीपुर एडीसी गांव में रहने वाले ऑटो ड्राइवर, दनशाई को बेचा था
उसने पूरी बात बताते हुए कहा कि, "जब गांव के मुखिया के सामने इस मुद्दे को उठाया गया तो वहां यह फैसला हुआ कि मैं अपने बच्चे को वापस लाऊंगा और इसीलिए मैं उस व्यक्ति से मिलने गया जिसे हमने हमारे बच्चे को बेचा था। "
यह दंपत्ति जब वहां पहुंचा तो जवाब मिला कि वह केवल माँ को ही बच्चा वापस करेगा। इसी बीच समाज कल्याण और सामाजिक शिक्षा विभाग ने कहा कि वह बच्चे को अपने माता-पिता के पास वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।"
स्थानीय बाल विकास कार्यालय के अनुसार उन्हें इस घटना की जानकारी हो चुकी है और वे चाइल्ड लाइन के माध्यम से उस बच्चे को उसकी मां को वापस करने के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं।
घोर गरीबी के आलम मे इस तरह्के दर्दनाक उदाहरण जब तब दिखाई देते है, इससे महज कुछ दिनों पहले ढलाई जिले के अलताछर्रा एडीसी गांव में एक आदिवासी महिला ने अपने बीमार पति के इलाज का खर्चा उठाने के लिए अपने 11 दिन के बच्चे को 5000 रुपयों में बेच दिया था। त्रिपुरा में, पिछले 2 सालों में गरीब आदिवासी परिवार द्वारा बच्चों के बेचे जाने के कम से कम 4 मामले सामने आ चुके हैं।