दान सिंह-एक प्रतिभाशाली संगीत कार ,जिसकी प्रतिभा को उचित सम्मान नहीं मिला

By Shobhna Jain | Posted on 20th May 2017 | मनोरंजन
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सुनील कुमार ,वी एन आई ,नयी दिल्ली 20-05-2017 आपकी प्रतिभा ,आपको दिया गया ईश्वर का वरदान है ,आप जिस तरह इस प्रतिभा का उपयोग करते हैं ,वो आप का उपहार है, ईश्वर के चरणों में!इस दुनिया ने दान सिंह की प्रतिभा की कदर नहीं की ,पर ईश्वर ही जानता था की वो कितने प्रतिभा सम्पन्न थे ! किसी से पूछिये- ”क्या आपने दान सिंह का नाम सुना है?” जवाब आयेगा- ”ज़ी , नहीं.” फिर पूछिये-आपने यह गाना सुना है क्या-”वो तेरे प्यार का गम, इक बहाना था सनम…?” वो तत्काल कहेगा- ”हाँ ज़ी, सुना है.” बस यही दान सिंह की बदनसीबी है. ”माई लव” फिल्म के इस सदाबहार गाने की धुन दान सिंह ने बनाई थी, जिसे लोग आज भी गुनगुना लेते हैं, फिल्म में एक गाना और था- ”ज़िक्र होता है जब क़यामत का, तेरे ज़ल्वों की बात होती है, तू जो चाहे तो दिन निकलता है, तू जो चाहे तो रात होती है.” शशि कपूर और शर्मीला टैगोर अभिनीत फिल्म ”माई लव” फिल्म में मुकेश के गाये इन गानों में संगीत निर्देशक दान सिंह का था! उन्होंने भूल ना जाना ,तूफ़ान जैसी फिल्मों में भी संगीत दिया व् मुकेश ,मोहम्मद रफ़ी ,आशा भोंसले , सपना अवस्थी जैसे कलाकारों से गीत गवाए संगीत कार मदन मोहन ने जब दान सिंह के राग "भैरवी " पर आधारित एक नग्में को सुना तो वो बहुत प्रभावित हुए और उनकी खुल कर तारीफ की !उन्होंने शुरुआत के कुछ दिनों संगीत निर्देशक खेम चंद्र प्रकाश के सहायक के रूप में काम किया! 2011 में इस प्रतिभा शैली संगीतकार का जयपुर में 78 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया !

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