नई दिल्ली, 25 नवंबर (सुनील जे/वीएनआई) राजस्थान की पारंपरिक समृद्ध विरासत समेटें, जूतियॉ, मोजड़ियॉ, चटखारे दार व्यजंन,सतरंगी रंगों की बहार राजधानी में चल रहे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलें में दर्शकों की खास पसंद बन रही हैं, खास तौर पर मेले में इस वर्ष पारंपरिक राजस्थानी हस्तशिल्प आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बदलते फैशन ट्रेंड और आधुनिक डिज़ाइनों के बीच देसी, हाथ से बने उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और इस मांग में सबसे आगे हैं राजस्थान की मशहूर जूतियां और मोजड़ियां। यह सिर्फ पहनने की चीज़ नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और इतिहास का जीवंत संगम हैं। मेले में राजस्थान पवेलियन अपने रंगों] लोक-संस्कृति और अनूठे उत्पादों के कारण विशेष चर्चा में है। यहां प्रदर्शित पारंपरिक राजस्थानी जूतियां और सदाबहार मोजड़ियां आगंतुकों और खरीदारों दोनों की पसंद बनी हुई हैं।
जोधपुर से आए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कारीगर मोहन लाल भाटी ने अपनी कला और विरासत के बारे में रोचक बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि एक जोड़ी जूती को पूरी तरह हाथ से तैयार करने में लगभग तीन से चार दिन का समय और अत्यंत बारीक मेहनत लगती है। यह कला उनके परिवार में 300 वर्षों से अधिक समय से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही, और वे इसे आज भी पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।भाटी न केवल इस विरासत को सहेज रहे हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को इसके साथ जोड़ने का प्रयास भी कर रहे हैं। NIFT जैसी प्रतिष्ठित डिजाइन संस्थाओं के छात्र उनकी कार्यशाला में इंटर्नशिप और ट्रेनिंग के लिए आते हैं, जहाँ वे उन्हें पारंपरिक जूती निर्माण की तकनीक और बारीकियां सिखाते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कार्यशाला में अब सिर्फ क्लासिक पारंपरिक जूतियां ही नहीं, बल्कि फैशन इंडस्ट्री की आधुनिक जरूरतों के अनुरूप डिजाइन किए गए नए उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। उनका लक्ष्य इस स्वदेशी कला को ग्लोबल बाज़ार में स्थायी पहचान दिलाना और युवाओं के बीच इसे फिर से लोकप्रिय बनाना है. वी एन आई
No comments found. Be a first comment here!