अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी खांसी की सिरप, जानिए क्या बदला और इसका आप पर क्या होगा असर

By Shobhna Jain | Posted on 17th Jun 2026 | VNI स्पेशल
डॉक्टर

घर में किसी को खांसी, जुकाम या बुखार हुआ नहीं कि सबसे पहले मेडिकल स्टोर से सिरप मंगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बिना डॉक्टर की सलाह के आसानी से खांसी और जुकाम की सिरप खरीद लेते थे। लेकिन अब यह व्यवस्था बदलने जा रही है। केंद्र सरकार ने दवाओं की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत अधिकांश औषधीय सिरप अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना नहीं खरीदे जा सकेंगे।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल-के में संशोधन करते हुए "सिरप" शब्द को उन घरेलू दवाओं की सूची से हटा दिया है जिन्हें अब तक बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीदा जा सकता था। यह संशोधन 29 दिसंबर 2025 को अधिसूचित किया गया और 30 दिसंबर 2025 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। मंत्रालय के अनुसार यह कदम सिरप आधारित दवाओं पर निगरानी मजबूत करने तथा वर्तमान जनस्वास्थ्य और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप नियामक व्यवस्था को अद्यतन बनाने के लिए उठाया गया है।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर खांसी और जुकाम की सिरप पर पड़ेगा। पहले ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल-के के तहत एक हजार से कम आबादी वाले गांवों में खांसी की सिरप अपेक्षाकृत सरल व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जा सकती थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी दवाओं तक आसान पहुंच देना था। अब "सिरप" शब्द को छूट वाली श्रेणी से हटाए जाने के बाद ऐसी दवाओं की बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोरों के माध्यम से ही संभव होगी और इसके लिए डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन आवश्यक होगा।

ध्यान देने योग्य है कि इस संशोधन के बाद सभी प्रकार की खांसी और जुकाम की सिरप डॉक्टर की पर्ची के दायरे में आ जाएंगी। इनमें बलगम को पतला और बाहर निकालने वाली एक्सपेक्टोरेंट तथा म्यूकोलाइटिक सिरप शामिल हैं, जिनमें एम्ब्रॉक्सोल, ग्वाइफेनेसिन और ब्रोमहेक्सीन जैसे तत्व पाए जाते हैं। सूखी खांसी को नियंत्रित करने वाली एंटीटसिव सिरप, जिनमें डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन जैसे तत्व होते हैं, भी अब बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं मिलेंगी। इसके अलावा जुकाम, एलर्जी और नाक बंद होने की समस्या के लिए उपयोग की जाने वाली मिश्रित सिरप भी इसी श्रेणी में आएंगी।

बच्चों के लिए उपयोग की जाने वाली कई तरल दवाओं पर भी इस निर्णय का प्रभाव पड़ेगा। सर्दी, जुकाम, बुखार या दर्द के लिए दी जाने वाली बाल चिकित्सा संबंधी सिरप और ओरल सस्पेंशन अब डॉक्टर की सलाह के बाद ही उपलब्ध होंगी। हालांकि पैरासिटामोल और आइबुप्रोफेन की गोलियां सामान्य घरेलू दवा के रूप में पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी।

यह जानना दिलचस्प है कि सरकार ने सभी ओवर-द-काउंटर दवाओं पर रोक नहीं लगाई है। गले की गोलियां, खांसी की लॉजेंज, पैरासिटामोल या एस्पिरिन की टैबलेट, एंटासिड, दर्द निवारक बाम, पोविडोन-आयोडीन जैसे एंटीसेप्टिक और ओआरएस पाउडर अभी भी बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीदे जा सकेंगे। नया नियम मुख्य रूप से औषधीय तरल सिरप पर लागू होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत सहित कई देशों में जहरीली खांसी की सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं ने दवा निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद दवा नियमन को और अधिक सख्त बनाने तथा निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग तेज हो गई थी।

गौरतलब है कि कई खांसी की सिरप में ऐसे औषधीय तत्व होते हैं जिनका गलत या अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। कुछ दवाओं के दुरुपयोग की घटनाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टर की निगरानी में दवाओं का उपयोग करने से गलत दवा लेने, ओवरडोज और संभावित दुष्प्रभावों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे रोग की सही पहचान और उचित उपचार सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

नई व्यवस्था के तहत अब केमिस्टों और दवा विक्रेताओं को किसी भी औषधीय खांसी या जुकाम की सिरप देने से पहले पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन की जांच करनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित दवा विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े दवा उत्पादक देशों में से एक है और दवा सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ी है। ऐसे में सिरप आधारित दवाओं की बिक्री पर निगरानी बढ़ाने का यह निर्णय जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह बदलाव न केवल दवाओं के अनियंत्रित उपयोग को रोकने में मदद करेगा, बल्कि लोगों को स्वयं उपचार के बजाय योग्य चिकित्सकों से परामर्श लेने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित दवा उपयोग की दिशा में यह कदम देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा जवाबदेह बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।


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