जसपाल राणा - पदकों के महारथी, सम्मानित कोच और मनु भाकर की सफलता के शिल्पकार

By Shobhna Jain | Posted on 13th Jun 2026 | खेल
जसपाल राणा

नई दिल्ली (वीएनआई )13 जून,  भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में जसपाल राणा का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वे उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने खिलाड़ी और कोच, दोनों भूमिकाओं में देश को गौरवान्वित किया। अपने शानदार निशाने, अद्भुत एकाग्रता और खेल के प्रति समर्पण के बल पर उन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अनेक यादगार सफलताएं दिलाईं। बाद में एक कोच के रूप में भी उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा ने कम उम्र में ही निशानेबाजी की दुनिया में अपनी पहचान बना ली थी। उनके पिता नारायण सिंह राणा स्वयं खेलों से जुड़े रहे और उन्होंने अपने पुत्र की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जसपाल राणा मुख्य रूप से 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल, स्टैंडर्ड पिस्टल और एयर पिस्टल स्पर्धाओं में भाग लेते थे।

वर्ष 1994 उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। हिरोशिमा एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इसके बाद उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का परचम लहराया। एशियाई खेलों में उन्होंने कई स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते तथा राष्ट्रमंडल खेलों में भी असाधारण प्रदर्शन किया।

राष्ट्रमंडल खेलों में जसपाल राणा का रिकॉर्ड अत्यंत शानदार रहा। उन्होंने कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। लंबे समय तक वे राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते रहे। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई और देश के युवाओं को इस खेल की ओर आकर्षित किया।

2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अपने पूरे करियर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 600 से अधिक पदक जीतने का गौरव हासिल किया।

उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया। वर्ष 1994 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया। उस समय वे देश के सबसे कम उम्र के अर्जुन पुरस्कार विजेताओं में शामिल थे। वर्ष 1997 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। खेल प्रशिक्षण और कोचिंग में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें विभिन्न राज्य और राष्ट्रीय स्तर के अनेक सम्मान भी प्राप्त हुए।

खिलाड़ी के रूप में सफलता प्राप्त करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग को अपना मिशन बनाया। उन्होंने युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षित कर भारतीय शूटिंग को नई दिशा दी। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारत की स्टार निशानेबाज मनु भाकर को तराशना माना जाता है।

मनु भाकर और जसपाल राणा का संबंध भारतीय खेल इतिहास की सबसे सफल कोच-खिलाड़ी साझेदारियों में गिना जाता है। राणा के मार्गदर्शन में मनु भाकर ने विश्व स्तर पर अनेक उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों, विश्व कप प्रतियोगिताओं और विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए कई पदक जीते। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर ने दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली स्वतंत्र भारत की पहली महिला खिलाड़ी बनीं। इस सफलता के पीछे जसपाल राणा के तकनीकी मार्गदर्शन, मानसिक मजबूती और अनुभव का महत्वपूर्ण योगदान माना गया।

मनु भाकर को उनकी उपलब्धियों के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उन्हें अर्जुन पुरस्कार भी प्रदान किया गया। वे विश्व स्तर पर भारत की सबसे सफल महिला निशानेबाजों में गिनी जाती हैं और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

जसपाल राणा की विरासत केवल उनके पदकों तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारतीय निशानेबाजी में उत्कृष्टता की ऐसी परंपरा स्थापित की, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियां भी उठाती रहेंगी। एक महान खिलाड़ी, प्रेरक कोच और खेल के सच्चे साधक के रूप में उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा। उनके पदक, सम्मान और उनके द्वारा तैयार किए गए चैंपियन खिलाड़ी आने वाले वर्षों तक उनकी महानता की कहानी कहते रहेंगे।


Leave a Comment:
Name*
Email*
City*
Comment*
Captcha*     8 + 4 =

No comments found. Be a first comment here!

ताजा खबरें

Thought of the Day
Posted on 20th Jul 2026
Today in History
Posted on 20th Jul 2026

Connect with Social

प्रचलित खबरें

rose
Thought of the Day

Posted on 2nd Jan 2026

naga
Today in History

Posted on 30th Jun 2025

reel1
Thought of the Day

Posted on 3rd Jul 2026

Today in History
Posted on 8th May 2026
Today in History
Posted on 18th Oct 2025
Today in History
Posted on 1st Aug 2025
Today in History
Posted on 29th Aug 2025
Thought of the Day
Posted on 4th Feb 2026
© 2020 VNI News. All Rights Reserved. Designed & Developed by protocom india