'रोहित शर्मा' का शतक नहीं बचा सका भारत को, 'शुभमन गिल' ने भी खेली कप्तानी पारी, फिर भी

By VNI India | Posted on 20th Jul 2026 | खेल
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नई दिल्ली/लौर्ड्स (वीएनआई)  20 जुलाई ऐतिहासिक 'लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड' पर भारतीय टीम ने अंत तक हार नहीं मानी और शानदार संघर्ष का परिचय दिया, लेकिन 'रोहित शर्मा' की यादगार शतकीय पारी भी भारत को जीत नहीं दिला सकी। तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 27 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 3 विकेट पर 387 रन का विशाल स्कोर बनाया, जिसके जवाब में भारतीय टीम 7 विकेट पर 360 रन ही बना सकी। आखिरी ओवर तक चले इस रोमांचक मुकाबले ने क्रिकेट प्रेमियों की धड़कनें बढ़ाए रखीं।

भारत की हार जितनी निराशाजनक रही, उससे कहीं अधिक प्रेरणादायक 'रोहित शर्मा' की बल्लेबाज़ी रही। हाल के समय में उनकी फॉर्म पर उठ रहे सवालों का उन्होंने अपने बल्ले से करारा जवाब दिया। भारतीय कप्तान ने 110 गेंदों में शानदार 138 रन बनाए और अपने वनडे करियर का 34वां शतक जड़ा। इसके साथ ही वह 'लॉर्ड्स' के ऐतिहासिक मैदान पर वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज़ भी बन गए। उनकी पारी में शानदार ड्राइव, दमदार पुल शॉट और बेखौफ बल्लेबाज़ी का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। एक समय ऐसा लग रहा था कि रोहित अकेले दम पर भारत को ऐतिहासिक जीत दिला देंगे, लेकिन निर्णायक क्षणों में मध्यक्रम उनका साथ नहीं दे सका।

388 रन के कठिन लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को जिस तेज शुरुआत की जरूरत थी, वह 'रोहित शर्मा' और कप्तान 'शुभमन गिल' ने मिलकर दी। दोनों बल्लेबाज़ों ने पहले विकेट के लिए 147 रन जोड़कर इंग्लैंड पर दबाव बना दिया। 'शुभमन गिल' ने 77 रन की बेहद जिम्मेदार और संयमित पारी खेली। उन्होंने एक छोर संभाले रखा, जबकि दूसरे छोर से रोहित इंग्लैंड के गेंदबाज़ों पर लगातार हमला बोलते रहे। दोनों की साझेदारी ने भारत को मुकाबले में पूरी तरह बनाए रखा और जीत की उम्मीदें जगा दीं।

गिल के आउट होने के बाद 'विराट कोहली' ने मोर्चा संभाला और 74 रन की शानदार पारी खेली। रोहित और विराट ने मिलकर लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दोनों अनुभवी बल्लेबाज़ों ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया, जिससे मैच आखिरी चरण तक रोमांचक बना रहा।

इससे पहले इंग्लैंड के कप्तान 'हैरी ब्रूक' ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया और उनके बल्लेबाज़ों ने इस निर्णय को पूरी तरह सही साबित किया। सलामी बल्लेबाज़ 'बेन डकेट' और 'जैकब बेथेल' ने भारतीय गेंदबाज़ों पर शुरुआत से ही दबाव बना दिया। दोनों ने पहले विकेट के लिए 192 रन की विशाल साझेदारी कर भारत को बैकफुट पर धकेल दिया। भारतीय गेंदबाज़ सही लाइन और लेंथ खोजते रहे, जबकि इंग्लैंड के बल्लेबाज़ हर ढीली गेंद का भरपूर फायदा उठाते रहे।

इंग्लैंड की ओर से 'बेन डकेट' सबसे बड़े स्टार रहे। बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने 141 रन की शानदार पारी खेलते हुए 'लॉर्ड्स' में वनडे का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनाने का नया रिकॉर्ड कायम किया। उन्होंने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए और शानदार स्ट्राइक रोटेशन से भारतीय गेंदबाज़ों को कोई मौका नहीं दिया। उनकी पारी ने इंग्लैंड के विशाल स्कोर की मजबूत नींव रखी।

युवा बल्लेबाज़ 'जैकब बेथेल' शतक से सिर्फ नौ रन दूर रह गए, लेकिन उनकी 91 रन की पारी भी किसी शतक से कम नहीं थी। इसके बाद अनुभवी 'जो रूट' ने नाबाद 74 रन बनाकर पारी को मजबूती दी, जबकि विकेटकीपर 'जोस बटलर' ने केवल 13 गेंदों में नाबाद 41 रन की विस्फोटक पारी खेलकर अंतिम ओवरों में तेजी से रन बटोरे। इन पारियों की बदौलत इंग्लैंड ने 3 विकेट पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया।

भारतीय गेंदबाज़ों के लिए यह दिन मुश्किल साबित हुआ। 'प्रसिद्ध कृष्णा' ने दो विकेट लेकर सबसे सफल भारतीय गेंदबाज़ का स्थान हासिल किया, जबकि 'प्रिंस यादव' को एक विकेट मिला। हालांकि पूरी पारी के दौरान भारतीय गेंदबाज़ रनगति पर नियंत्रण नहीं रख सके। खासकर अंतिम ओवरों में इंग्लैंड ने तेजी से रन बटोरे। तेज़ गेंदबाज़ 'जसप्रीत बुमराह' की कमी भी साफ महसूस हुई, क्योंकि भारतीय गेंदबाज़ समय पर साझेदारियां तोड़ने में सफल नहीं रहे।

मैच का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 'जैकब बेथेल' ने शानदार बल्लेबाज़ी कर रहे 'रोहित शर्मा' को आउट किया। रोहित के पवेलियन लौटते ही मुकाबले का रुख बदल गया। इसके बाद 'सैम करन' ने बेहतरीन गेंदबाज़ी करते हुए 'विराट कोहली' सहित भारत के कई महत्वपूर्ण बल्लेबाज़ों को आउट किया। उनकी धीमी गेंदें, सटीक यॉर्कर और शानदार विविधता ने भारतीय बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। करन ने चार विकेट लेकर मैच को पूरी तरह इंग्लैंड की झोली में डाल दिया।

फील्डिंग में भी इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों ने कई महत्वपूर्ण रन बचाए और दबाव की स्थिति में शानदार कैच लपके। 'जैकब बेथेल' ने बल्लेबाज़ी के अलावा रोहित शर्मा का अहम विकेट लेकर अपनी ऑलराउंड क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। पूरी टीम ने 50 ओवर तक ऊर्जा और अनुशासन के साथ मैदान पर बेहतरीन खेल दिखाया।

विकेटकीपिंग में 'जोस बटलर' ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने विकेट के पीछे बेहतरीन ग्लववर्क किया और गेंदबाज़ों का लगातार उत्साह बढ़ाया। भारत की ओर से 'केएल राहुल' ने विकेटकीपिंग में कोई बड़ी गलती नहीं की, लेकिन बल्लेबाज़ी में वह प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे।

भारत की हार के कई कारण रहे। गेंदबाज़ शुरुआती साझेदारी जल्दी नहीं तोड़ सके, अंतिम ओवरों में जरूरत से ज्यादा रन लुटा दिए और बीच-बीच में विकेट लेने में भी असफल रहे। लक्ष्य का पीछा करते समय रोहित शर्मा का विकेट निर्णायक साबित हुआ। उनके आउट होते ही भारतीय पारी की लय टूट गई और सैम करन की घातक गेंदबाज़ी ने जीत की बची हुई उम्मीद भी समाप्त कर दी।

इंग्लैंड की ओर से सबसे ज्यादा रन 'बेन डकेट' (141) ने बनाए, जबकि भारत के लिए 'रोहित शर्मा' 138 रन बनाकर सर्वोच्च स्कोरर रहे। बल्लेबाज़ी में डकेट, रोहित शर्मा, जैकब बेथेल (91), शुभमन गिल (77), विराट कोहली (74), जो रूट (नाबाद 74) और जोस बटलर (13 गेंदों पर नाबाद 41) ने शानदार प्रदर्शन किया। गेंदबाज़ी में 'सैम करन' चार विकेट लेकर मैच के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ रहे, जबकि भारत की ओर से 'प्रसिद्ध कृष्णा' ने दो और 'प्रिंस यादव' ने एक विकेट लिया।

'जैकब बेथेल' को उनके शानदार हरफनमौला प्रदर्शन के लिए 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया। उन्होंने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 93 गेंदों में शानदार 91 रन बनाए और 'बेन डकेट' के साथ 192 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर इंग्लैंड की विशाल पारी की नींव रखी। इसके बाद गेंदबाज़ी में उन्होंने भारत के सबसे खतरनाक बल्लेबाज़ 'रोहित शर्मा' (138) का बहुमूल्य विकेट लेकर मैच का रुख इंग्लैंड की ओर मोड़ दिया। बल्ले और गेंद दोनों से उनके बेहतरीन योगदान ने इंग्लैंड की 27 रन की जीत और 2-1 से सीरीज़ जीत में निर्णायक भूमिका निभाई।

गौरतलब है कि भले ही भारत सीरीज हार गया, लेकिन 'रोहित शर्मा' की शतकीय पारी भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक बात रही। उन्होंने साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में आज भी उनके बल्ले की धार बरकरार है। वहीं 'शुभमन गिल' ने जिम्मेदार कप्तानी पारी खेलकर भविष्य के नेतृत्व की मजबूत झलक दिखाई और 'विराट कोहली' ने भी शानदार लय का परिचय दिया। हालांकि यदि भारत को विदेशी धरती पर लगातार बड़ी जीत दर्ज करनी है तो गेंदबाज़ी और फील्डिंग दोनों विभागों में और अधिक सुधार करना होगा।

इंग्लैंड के लिए यह जीत पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम रही। 'बेन डकेट' की रिकॉर्डतोड़ पारी, 'जैकब बेथेल' का हरफनमौला प्रदर्शन, 'जो रूट' का अनुभव, 'जोस बटलर' की विस्फोटक बल्लेबाज़ी और 'सैम करन' की मैच जिताऊ गेंदबाज़ी ने मेज़बान टीम को शानदार जीत दिलाई। इंग्लैंड ने न केवल 27 रन से मुकाबला जीता, बल्कि 2-1 से वनडे सीरीज भी अपने नाम कर यह साबित कर दिया कि वह दुनिया की सबसे मजबूत क्रिकेट टीमों में से एक है।


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