नई दिल्ली, 12 अक्टूबर, (वीएनआई) शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है, ये देवी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक मानी जाती हैं। इनकी पूजा से जीवन में धैर्य, शक्ति और सफलता प्राप्त होती है। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई और इसका समापन 18 अक्टूबर शुक्रवार को होगा. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है.
मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। इनका यह रूप तपस्या और साधना का प्रतीक है। इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। नवरात्रि में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से संकल्प शक्ति मजबूत होती है। जीवन में आने वाली कठिनाइयों को सहने की शक्ति मिलती है। विद्या, तप और आत्मबल की प्राप्ति होती है। विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
इनकी पूजा करने के लिए प्रातः स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाकर ध्यान करें। मां को अक्षत, रोली, चंदन, फूल और फल अर्पित करें। विशेष रूप से शक्कर और पंचामृत का भोग लगाएं।ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः का जाप करें, अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें।
No comments found. Be a first comment here!