नई दिल्ली विश्वास कुमार (वीएनआई) 18अक्टूबर श्री महावीर जी, राजस्थान मे गत सप्ताह सम्पन्न हुआ वह एक अनूठा समारोह था, एक ऐसा पुरस्कार समारोह था जहां अध्यात्म की दिव्यता का बुद्धिमत्ता के साथ अद्भुत संगम था . एक गरिमा के साथ सम्पन्न हुये 26वें यंग जैना अवार्ड 2026 समारोह में देश भर की जैन मेधावी प्रतिभायें जिनमें सीनियर्स और जूनियर अवार्डीस शामिल थे. इस समारोह में मेधावी छात्रों के अलावा उनके परिवारजन, पुराने पुरस्कृत हुये मेधावी छात्र, जो आज प्रतिष्ठित पदों पर आसीन हैं और समाज में अपनी बहुमूल्य अंशदान दे रहे हैं, इस के अलावा प्रबुद्धजन,अध्यात्म और अर्थ के अनूठे संगम से अपनी व्यापारिक गतिविधियां चलाने वाले बेनाडा परिवार के इसी परंपरा को आगे बढा रहे प्रतिनिधि उद्द्योगपति पी एल बेनाडा , श्री महावीर जी दिगंबर जैन मंदिर की कार्यसमिति के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल, कोषाध्यक्ष हेमंत सौगानी व अनेक कर्मठ हस्ताक्षर शामिल थे. वरिष्ठ पत्रकार एवं कॉलमनिस्ट,वी एन आई समाचार सेवा की प्रधान संपादक, अंतरराष्ट्रीय मामलों की विशेषज्ञ, एवं इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प्स की पूर्व अध्यक्ष सुश्री शोभना जैन, एवं जानी मानी शिक्षाविद व इंदौर स्थित देवी अहिल्या बाई होलकर विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति श्रीमती रेनू जैन समारोह की मुख्य अतिथि रही. उन्होंने पुरस्कार वितरण के साथ अपने आशीर्वचनों से युवाओं का पथ प्रदर्शन किया किया.
महान तपस्वी संत एवं दार्शनिक, पथ प्रदर्शक पूज्यनीय आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ,पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज आशीर्वाद तथा आचार्य श्री के सुयोग्य शिष्य *पूज्य मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज की प्रेरणा से 2001 में शुरू हुआ मैत्री समूह द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित "यंग जैना अवार्ड' देशभर की मेधावी जैन छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ उन्हें उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करने की भावना से शुरू किया गया। सुश्री शोभना ने पुरस्कृत युवाओं से गहन अध्ययन के साथ संस्कारों, मूल्यों से समझौता ना करने के साथ ही जैन दर्शन के अनेकांत जैसे दर्शन का जीवन में पालन करने की सीख दी जहां एकांगी दृष्टिकोण की जगह दूसरे के दृष्टिकोण का भी सम्मान करने पर जोर दिया जाता हैं उन्होंने प्राणी मात्र से क्षमा भाव रखने , बेहतर नागरिक बनने और रिश्तों का सम्मान करने पर जोर दिया तभी सही मायने में वसुधैव कुटुकंब की अवधारणा परिपूर्ण हो सकेगी , समाज में सौहार्द समरसता आ सकेगी. श्रीमति रेनु ने इस अवसर पर युवाओं से भारतीय मूल्यों , जैन दर्शन के सिद्धांतों का जीवन में अनुसरण करने पर बल दिया. उन्होंने कहा, छात्र जीवन में संस्कारी बनें, एकाग्र चित्त से अध्ययन करें और भारत की महान संस्कृति को समझे उसे अपने जीवन मूल्यों में सर्वोपरि रखें. इस अवसर पर मौजूद विशिष्ट जन ने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने तथा भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की प्रेरणा दी।
वर्ष 2001 में शिवपुरी (म. प्र.) से प्रारम्भ हुई *यंग जैना अवार्ड* की यात्रा आज जैन समाज की युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अभियान , बन चुकी है। इस पहल का उद्देश्य केवल शैक्षिक उपलब्धियों का सम्मान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करना भी है। इस वर्ष के पुरस्कृत युवाओं के चयन का आधार यही था . ऐस बार तीन देशों, 23 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से प्रविष्टियाँ मिली. यंग जैना अवार्ड 2026 ने इस वर्ष राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान दर्ज कराई। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष कुल 2,422 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, इसके साथ ही 20 विभिन्न शैक्षणिक बोर्डों के विद्यार्थियों की भागीदारी ने इस आयोजन की व्यापकता को रेखांकित किया। अहम बात यह हैं कि आचार्य श्री स्वयं साहित्यकार एवं अध्येता थे, जिन्होने जैन दर्शन पर अनेक ग्रंथ और महाकाव्य लिखे, जिन में महाकाव्य मूकमाटी एक कालजयी रचना हैं जिस पर चालीस से अधिक शोधार्थी अपनी पी एच डी कर चुके हैं. मुनि श्री क्षमा सागर का शैक्षणिक करियर भी रिकॉर्ड से भरा रहा है,. इंजीनियरी की एम टेक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद उन्होंने नौकरी या उद्द्य्म लगाने की बजाय सन्यास आश्रम की रह चुनी और घोर तपस्या का जीवन जीया गंभीर बीमारी के बावजूद अपनी चर्या का पालन नहीं त्यागा. वे एक बेहद संवेदनशील कवि रहे तथा उन के अनेक काव्य संग्रह प्रकाशित भी हो चुके हैं. स्व की खोज के साथ के साथ उनकी कविताओं मे प्रकृति, पक्षी बेहद संवेदनशीलता से उकेरे गये हैं
यंग जैना एवार्ड के आयोजन से जुड़ा एक बेहद प्रेरणा स्पद पहलू ये हैं कि इस का पूरा आयोजन पुराने पुरस्कृत छात्र जो अब प्रतिष्ठित पदों पर आसीन ,हैं हर वर्ष करते हैं और उन के साथ नये छात्र मिल कर एक नये जोश और उर्जा से शामिल होते हैं. कितने ही साथियों के साथ शुरू हुई इस यात्रा की कमान अब निशा,रेशु,आभा जैन जौइन्टकमिश्नर ्जी एस टी, राजीव जैन रश्मि,प्रीति,चिया जैसे कितने ही कर्मठ प्रोफेशनल्स आगे बढा रहे हैं, उम्र में बड़े, युवाओं, किशोरों के साथ छोटे छोटे बच्चे जब वोलंटियर्स की भूमिका पूरी जिम्मेवारी से उल्लास से दौड़ते नजर आते हैं तो लगता हैं हमारा कल सुरक्षित हाथों में हैं यह काफिला बढता चला जा रहा हैं और इस का उदाहरण खुद छात्रों की पुरस्कार की पात्रता पर खरा उतरने के ऑकड़ें उदाहरण हैं यह उपलब्धि निश्चय ही यंग जैनअवार्ड की बढ़ती लोकप्रियता और जैन समाज की युवा प्रतिभाओं को एक साझा मंच पर लाने के प्रयासों का प्रमाण है।
शैक्षणिक उत्कृष्टता का परिचय देते हुए इस वर्ष 330 विद्यार्थियों ने ना केवल एक विषय में बल्कि कुछ विषयों में 100 प्रतिशत अंक* प्राप्त किए। वहीं, 80 विद्यार्थियों का चयन अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये चयन हुआ। इसके अतिरिक्त, स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के 55 विद्यार्थियों की उपलब्धियाँ भी इस आयोजन की व्यापकता को दर्शाती हैं। इस वर्ष कुल सम्मानित विद्यार्थियों में 59 प्रतिशत छात्राओं की भागीदारी महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी प्रगति का उल्लेखनीय उदाहरण रही। साथ ही, दिव्यांग अभ्यर्थियों की सहभागिता ने प्रतिभा को समान अवसर प्रदान करने की भावना को रेखांकित किया। जैसा कि सम्मान समारोह में पुरस्कृत एक छात्र के अभिभावक ने कहा कि महाराज श्री की शिक्षाओं को जिस तरह को आधार बना कर मैत्री समूह शिक्षा के साथ संस्कार और व्यक्तित्व विकास पर बल देता हैं,वह बेहद प्रेरणास्पद हैं.केरियर मार्गदर्शन, प्रेरक विचारों तथा शैक्षणिक संवाद के माध्यम से युवाओं को अपने लक्ष्य निर्धारित करने, चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना करने और अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज हित में करने के अवार्ड की प्रेरणा अप्रतिम हैं । यंग जैना अवार्ड केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि *शिक्षा, संस्कार, अध्यात्म, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक चेतना का संगम बन गया है।आयोजन ने युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा और विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने का संदेश दिया। एक वालंटियर के अनुसार*मैत्री समूह* का यह निरंतर प्रयास जैन समाज की प्रतिभाओं को उचित मंच प्रदान करने, उनमें सेवा, सदाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है। 26वें यंग जैना अवार्ड शिक्षा और संस्कारों के समन्वय के माध्यम से एक जागरूक, आत्मविश्वासी एवं जिम्मेदार युवा पीढ़ी के निर्माण के संकल्प को और सुदृढ़ करता है। यह काफिला यूंही निरंतर गति से अविरल आगे बढ़ता रहे और प्रकाश स्तंभ की भूमिका निभाता रहे, इसी शुभेच्छा के साथ....समाप्त
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