क्यों उदास है हमारा देश?

By Shobhna Jain | Posted on 22nd Mar 2017 | देश
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नई दिल्ली 22 मार्च (वीएनआई)भारत दक्षिण एशिया का सबसे उदास देश है यानि खुशी के आंकड़े मे भारत अपने सभी पड़ोसी देशो से पिछड़ा है दुनिया संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की ओर से 155 देशो की जारी ताजा रिपोर्ट में नॉर्वे दुनिया का सबसे खुश देश घोषित किया गया है भारत 122वें स्थान पर है.्सिंगापुर एशिया का सबसे सुखी देश है पिछले साल डेनमार्क दुनिया का सबसे खुश देश था. 'द वर्ल्ड हैप्पिनेस रिपोर्ट' के मुताबिक, किसी देश की खुशहाली जानने का पैमाना समाजिक सुरक्षा, रहन-सहन और न्याय अहम है. खुशी मापने के तरीकों में आर्थिक विकास, सामाजिक सहायता, जिंदगी अपने ढंग से जीने की आजादी, औसत उम्र, उदारता और भ्रष्टाचार जैसे कई कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है. इस साल की लिस्ट में नॉर्वे, डेनमार्क, आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और फिनलैंड दुनिया के पांच सबसे खुशहाल देश हैं. वहीं इस रिपोर्ट में सेंट्रल अफ्रीका को दुनिया का सबसे ्दे नाखुश देश बताया गया है. गौरतलब है कि दक्षिण एशिया का सबसे उदास देश भारत ्को माना गया है , सबसे सुखी देशों की फेहरिस्त मे भारत 122वें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान क्रमशः 80वें, 110वें, 99वें और 97वें पर हैं ्यानि हमारे गरीब पड़ोसी खुशी के मामले मे हमसे ज़्यादा अमीर हैं . लंबे वक्त से गृहयुद्ध की मार झेल रहा सीरिया 152 वें स्थान पर है, जबकि यमन और सूडान जहां अकाल जैसे हालात है, उन्हें 146 और 147 वें नंबर पर रखा गया है. संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ल्ड हैप्पिएस्ट डे 20 मार्च को मनाया जाता है. इस बार संयुक्त राष्ट्र के सबसे ज़्यादा खुश देशों की लिस्ट भी उसी दिन जारी की गई है. इसके तहत हर साल दुनिया के डेढ़ सौ देशों में 1000 इंसानों से मनोवैज्ञानिक प्रकृति के सवाल किए जाते हैं. इस बार एक सवाल यह भी पूछा गया था कि आखिर अमेरिका में स्थायी आर्थिक विकास के बावजूद भी सुख का स्तर कम क्यों होता जा रहा है. इस रिपोर्ट को तैयार करने वालों का कहना है कि अमेरिका में सिर्फ आर्थिक विकास पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन खुश रहने के लिए सिर्फ ये वजह काफी नहीं है.

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