दिल्ली में GPA पर बढ़ी सख्ती: आखिर क्या है नया नियम और आम लोगों पर इसका क्या पड़ेगा असर?

By VNI India | Posted on 15th Jul 2026 | देश
दिल्ली

नई दिल्ली (वीएनआई) 15 जुलाई, दिल्ली में वर्षों तक मकान, फ्लैट और प्लॉट की खरीद-फरोख्त के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) का व्यापक उपयोग होता रहा। कम खर्च और अपेक्षाकृत आसान प्रक्रिया होने के कारण यह तरीका काफी लोकप्रिय था। लेकिन समय के साथ GPA के माध्यम से होने वाले कुछ लेनदेन में फर्जीवाड़े, एक ही संपत्ति को कई लोगों को बेचने और स्टांप ड्यूटी की चोरी जैसी शिकायतें बढ़ने लगीं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने और संपत्ति के लेनदेन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से अब दिल्ली में GPA से जुड़े मामलों की जांच पहले की तुलना में अधिक सख्ती से की जा रही है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि GPA आखिर है क्या। जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से कुछ कार्य करने का अधिकार देता है। इसके तहत अधिकृत व्यक्ति संपत्ति की देखभाल कर सकता है, किराया वसूल सकता है, सरकारी कार्यालयों में आवश्यक कार्य करा सकता है या अन्य अधिकृत जिम्मेदारियां निभा सकता है।

हालांकि, कानूनविदों के अनुसार GPA और मालिकाना हक दोनों अलग-अलग बातें हैं। GPA किसी व्यक्ति को कार्य करने का अधिकार देती है, लेकिन उससे संपत्ति का स्वामित्व स्वतः हस्तांतरित नहीं हो जाता। किसी मकान, फ्लैट या प्लॉट का कानूनी मालिकाना हक सामान्यतः पंजीकृत बिक्री विलेख (रजिस्टर्ड सेल डीड) के माध्यम से ही प्राप्त होता है।

इसे एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए श्री शर्मा अपने बेटे को GPA देते हैं ताकि वह उनकी अनुपस्थिति में मकान का किराया वसूल सके, बिजली-पानी के बिल जमा कर सके और सरकारी कार्यालयों में उनके प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर सके। इन सभी अधिकारों के बावजूद मकान के मालिक श्री शर्मा ही रहेंगे। केवल GPA मिलने से बेटे के नाम मालिकाना हक नहीं आ जाएगा।

दिल्ली में हाल के प्रशासनिक निर्देशों के बाद अब सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में प्रस्तुत होने वाले GPA दस्तावेजों की पहले की अपेक्षा अधिक गहन जांच की जा रही है। यदि किसी दस्तावेज से यह संकेत मिलता है कि GPA का उपयोग वास्तव में संपत्ति की बिक्री को छिपाने के लिए किया जा रहा है, तो संबंधित अधिकारी उसकी विस्तार से जांच कर सकते हैं।

जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि क्या दस्तावेज में संपत्ति के बदले धनराशि का उल्लेख है, क्या खरीदार को संपत्ति का कब्जा भी दिया जा रहा है, क्या GPA को अपरिवर्तनीय (इर्रिवोकेबल) बनाया गया है तथा क्या उसमें संपत्ति को बेचने, गिरवी रखने, उपहार में देने या स्थायी रूप से हस्तांतरित करने जैसे व्यापक अधिकार दिए गए हैं। यदि दस्तावेज का स्वरूप वास्तविक बिक्री जैसा प्रतीत होता है, तो कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

संपत्ति विशेषज्ञों के अनुसार इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य वैध GPA को समाप्त करना नहीं है, बल्कि GPA की आड़ में होने वाले अवैध लेनदेन, फर्जीवाड़े और स्टांप ड्यूटी की चोरी पर रोक लगाना है। इससे संपत्ति बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ईमानदार खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

क्या इसका मतलब यह है कि GPA अब अमान्य हो गई है? इसका उत्तर है—नहीं। GPA आज भी पूरी तरह वैध कानूनी दस्तावेज है, लेकिन उसका उपयोग उसी उद्देश्य तक सीमित है जिसके लिए उसे बनाया गया है। उदाहरण के लिए यदि कोई बुजुर्ग अपनी संपत्ति के प्रबंधन के लिए अपने बेटे या बेटी को अधिकार देना चाहता है, कोई एनआरआई भारत में अपनी संपत्ति की देखभाल किसी रिश्तेदार के माध्यम से कराना चाहता है या कोई व्यक्ति अपनी ओर से किसी विश्वसनीय व्यक्ति को सरकारी कार्यों के लिए अधिकृत करना चाहता है, तो ऐसे मामलों में GPA आज भी पूरी तरह मान्य है।

आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि वे दिल्ली में कोई मकान, फ्लैट या प्लॉट खरीदने जा रहे हैं, तो केवल GPA देखकर संतुष्ट न हों। यह सुनिश्चित करें कि विक्रेता के पास संपत्ति के वैध मालिकाना दस्तावेज हैं और स्वामित्व का हस्तांतरण कानून के अनुसार पंजीकृत बिक्री विलेख के माध्यम से किया जा रहा है। केवल GPA के आधार पर संपत्ति खरीदना भविष्य में कानूनी विवाद और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संपत्ति में निवेश करने से पहले उसके सभी दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए। यदि किसी दस्तावेज को लेकर कोई संदेह हो तो विधिक सलाह लेना हमेशा बेहतर विकल्प होता है।

एक नजर में नए दिशा-निर्देश

• केवल GPA के आधार पर संपत्ति का मालिकाना हक प्राप्त नहीं होता।

• GPA के माध्यम से वास्तविक बिक्री छिपाने की आशंका वाले मामलों की विशेष जांच की जाएगी।

• सब-रजिस्ट्रार कार्यालय ऐसे दस्तावेजों की गहन जांच करेंगे जिनमें बिक्री जैसे प्रावधान दिखाई देते हैं।

• भुगतान, कब्जा, अपरिवर्तनीय GPA तथा संपत्ति बेचने या स्थायी रूप से हस्तांतरित करने के अधिकार जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

• फर्जीवाड़े और स्टांप ड्यूटी की चोरी रोकना इन दिशा-निर्देशों का प्रमुख उद्देश्य है।

सरल शब्दों में समझें तो GPA किसी व्यक्ति को आपकी ओर से काम करने की अनुमति देती है, लेकिन मालिकाना हक नहीं देती। मालिक वही माना जाएगा जिसके नाम पर कानून के अनुसार संपत्ति का वैध हस्तांतरण हुआ हो। दिल्ली में बढ़ी यह सख्ती आम नागरिकों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि संपत्ति के लेनदेन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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