नई दिल्ली, 5 दिसंबर (वीएनआई) सीबीआई बनाम सीबीआई मामले में उच्चतम न्यायालय में आज सुनवाई के दौरान केन्द्र ने कहा कि आलोक वर्मा अभी भी सी बी आई निदेशक हैं. सरकारी बंगला कार सबकुछ वही है.साथ ही राकेश अस्थाना भी स्पेशल डायरेक्टर हैं
आज मामले में सरकार का पक्ष रखते एटॉर्नी जनरल ने कहा कि हमने वर्मा को सिर्फ छुट्टी पर भेजा है. गाड़ी, बंगला, भत्ते, वेतन और यहां तक कि पदनाम भी पहले की तरह है. आज की तारीख में वही सीबीआई निदेशक हैं. पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों ने दलील ्के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को लेकर कोई फैसला नहीं दिया था. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा वापस ड्यूटी पर लौटेंगे या आगे उन्हें जांच का सामना करना होगा. आलोक वर्मा ने उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के सरकार के फ़ैसले को चुनौती दी है. केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा, जिन्हें केन्द्र ने उनके अधिकारों से वंचित करके अवकाश पर भेज दिया है, ने पिछली सुनवाई यानी 29 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति दो साल के निश्चित कार्यकाल के लिये हुयी थी और इस दौरान उनका तबादला तक नहीं किया जा सकता.
केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़े विवाद के बाद केन्द्र ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर दोनों अधिकारियों को अवकाश पर भेज दिया था. वर्मा ने उनके अधिकार लेने और अवकाश पर भेजने के सरकार के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है.अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल सुप्रीम कोर्ट में बताया, 'सरकार ने सीवीसी की सलाह पर फैसला लिया था. दोनों अफसरों के बीच विवाद से सीबीआई का भरोसा लोगों में हिल गया था. ये फैसला बड़े जनहित और संस्थान का गरिमा बचाने के लिए लिया गया था. सरकार ने संस्थानिक अखंडता को बचाने के लिए आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला किया. आसाधारण हालात तो देखते हुए सीवीसी जांच पूरी होने तक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया.
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