द्वीपो,हरियाली वाले अंडमान क्षेत्र की खूबसूरती के अलावा दुनिया अब थिरकेगी यहा की अनूठी कला,संस्कृति की थाप पर भी..

By Shobhna Jain | Posted on 3rd May 2016 | देश
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नई दिल्ली,2 मई(शोभनाजैन/वीएनआई) कभी जो जगह काला पानी मानी जाती थी,इस नाम से एकाकीपन ,निराशाजनक की तसवीर बनती थी. लेकिन धीरे धीरे विशाल समुद्री द्वीपो, हरीतिमा और समुद्र की मनोहारी सुंदरता वाले क्षेत्र की पहचान बना लेने वाला अंडमान व निकोबार द्वीप क्षेत्र अब बहुत जल्द ही जाने माने अंतर राष्ट्रीय सांस्कृतिक दलों के गीत , संगीत और नृत्य की स्वर लहरियो से गूंज उठेंगा और साथ ही अंडमान क्षेत्र की अनूठी लेकिन अब तक दुनिया मे अनजानी सी सांस्कृतिक विरासत विदेशो मे अपनी कला के जलवे बिखेरेगी. दुनिया जानेगी अंडमान विपुल प्राकृतिक संपदा के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला प्रदेश भी है. जानेगी यहा की कला संस्कृति, लेखन,संगीत आदि विभिन्न कलाओ को. विदेशो मे भारतीय कला ,संस्कृति, भारतीय दर्शन, साहित्य और विभिन्न ललित कलाओ की सुगंध पहुंचाने वाली तथा विदेश मंत्रालय की ईकाई, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने अंडमान व निकोबार द्वीप के साथ इस आशय का समझौता किया है.इसके तहत दोनो ईकाइया मिलकर इस द्वीप की सांस्कृतिक विरासत को मिल कर बढाने और उसे देश विदेश तक पहुंचाने का काम करेगी. समझौते पर परिषद के महानिदेशक सी राजशेखर और अंडमान निकोबार द्वीप की तरफ् से वहा की कला और संस्कृति महासचिव अंकिता मिश्रा बुन्देला ने हस्ताक्षर किये . इस अवसर पर श्री राजशेखर ने कहा कि अंडमान क्षेत्र के बारे मे दुनिया मे अभी ज्यादा जानकारी नही है,उन्हे उम्मीद है कि दोनो इकाईयो के इस सांस्कृतिक पुल से अंडमान क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे मे दुनिया जान सकेगी, इस क्षेत्र को समझ सकेगी और यहा की सांस्कृतिक विरासत को सराह सकेगी . उन्होने कहा कि इसी माह परिषद अपने साल भर होने वाले कार्यक्रमो का वार्षिक केलेंडर जारी करेगी जिसमे अंडमान के ट्रुप के कार्यक्रमो को विदेशो मे प्रदर्शन के लिये भी शामिल किया जा सकेगा. उन्होने बताया कि परिषद फिलहाल दस राज्यो और केन्द्र शासित प्रदेशो के साथ मिल कर ऐसे कार्यक्रम चला रही है और इस सहयोग के आधार पर परिषद् ने इन राज्यो और केन्द्र शासित के साथ मिल कर यहा की संस्कृति की सुगंध विदेशो मे फैलाने की पहल की है . इसी कड़ी मे उन्होने कहा कि पुर्वोत्तर की संस्कृति को बढावी देने के लिये परिषद पुर्वोत्तर परिषद के साथ मिल कर ऐसे कार्यक्रम चला रही हैजिससे पूर्वोत्तर की संस्कृति विदेशो मे बने भारत के सांस्कृतिक केन्द्रो के जरिये दुनिया भर मे पहुंचाने का काम् हो रहा है. इस अवसर पर सुश्री बुंदेला ने कहा कि दर असल अंडमान क्षेत्र लघु भारत है जहा मॉनसून महोत्सव,बीच महोत्सव,फूड महोत्सव जैसे कितने ही आयोजन के जरिये यहा की संस्कृति और प्राकृतिक खूबसूरती को देश के साथ विदेश् भी पहुंचाने का काम हो रहा है.इसी क्रम मे अगले वर्ष जनवरी मे 'द्वीप महोत्सव' का भी कार्यक्रम है जिससे यहा के सभी द्वीपो की झलक सैलानी देख सकेंगे.इसके साथ ही द्वीप क्षेत्र की एक 'साहित्य महोत्सव' भी आयोजित करने की योजना है जिसमे देश विदेश के जाने माने लेखको को यहा की संस्कृति को जानने समझने और यहा की पृषठ्भूमि मे लेखन करने का न्यौता दिया जायेगा. उहोने कहा कि इस बारे मे परिषद विभिन्न दूतावासो और विदेशो मे स्थित अपने सांस्कृति्क केन्द्रो के जरिये लेखको के चयन मे सहायता देगा. उन्होने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि परिषद अंडमान क्षेत्र की अब तक अनजानी सी कला और संस्कृति को दुनिया के सामने लाने मे सहयोग कर रहा है.गौरतलब है कि परिषद दुनिया भर मे भारतीय कला और संस्कृति का ध्वज फहराने का काम कर रहा है. दुनिया भर मे भारत की समृद्ध कला, संस्कृति, साहित्य और विविध ललित कलाओ कि प्रदर्शित करने के लिये आयोजित होने वाले भारत महोत्सव, विदेशी छात्रो को भारत मे पढने केलिये छात्र वृति देने, विदेशो मे हिंदी को प्रोत्साहन देने , विदेशी छात्रो को भारत मे हिंदी पढने के लिये छात्र वृति, प्राच्य भारतीय विद्या, दर्शन शास्त्र संबंधी विदेशी विश्वविद्द्यालयो मे इंडिया चेयर आदि गठित करने आदि विभिन्न कार्यक्रमो के लिये वे विभिन्न भारतीय राज्यो और केन्द्र शासित प्रदेशो के साथ मिल कर काम्कर रही है.वी एन आई

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