अहिंसा और गांधीजी

By Shobhna Jain | Posted on 2nd Oct 2017 | देश
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  नयी  दिल्ली 02 -10-2017,सुनील कुमार ,वी एन  आई

कहते  हैं    अहिंसा  का केंद्र बिंदु  प्रेम  का सिद्धांत  है

गांधीजी के आध्यात्मिक आदर्शवाद में सत्य के बाद अहिंसा का विशिष्ट स्थान है. अहिंसा की परम्परा भारत के लिए कोई नई वस्तु नहीं है प्रायः सभी भारतीय धर्म ग्रन्थों में अहिंसा का स्वरूप प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से देखने को मिलता है. गांधी जी ने अहिंसा का प्रयोग बहुत बड़े पैमाने पर किया, इन्होंने अहिंसा का व्यावहारिक जीवन में प्रयोग कर यह सिद्ध कर दिया कि अहिंसा भी एक महान अस्त्र है. अहिंसा को विश्वव्यापी बनाने का श्रेय गांधी जी को है।

       गांधी जी मानते थे कि मानवीय संबंधों में सभी समस्याओं का एक मात्र हल अहिंसा ही है. अहिंसा, हिंसा से अधिक शक्तिशाली है. अहिंसा का अर्थ है मन, कर्म तथा वचन से किसी भी जीवधारी को आघात या कष्ट न पहुँचाना. गांधी जी का कहना था कि अहिंसा किसी अकर्मण्यता का दर्शन नहीं है. यह तो कर्मठता और गतिशीलता का दर्शन है. गांधी जी के अनुसार जो व्यक्ति मन, कर्म, वचन का पालन करता है उसके लिए कोई शत्रु नहीं होता बल्कि शत्रु भी मित्र बन जाएगा

 

 


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