बारूद के ढेर पर मध्य-पूर्व: अमेरिका–ईरान आमने-सामने, हर जवाबी हमले के साथ गहराता संकट

By VNI India | Posted on 9th Jul 2026 | विदेश
अमेरिका और ईरान

नई दिल्ली (वीएनआई ) 9 जुलाई,  मध्य-पूर्व में एक बार फिर बारूद की गंध तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना बनाया। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सामरिक और सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान की सैन्य क्षमता को सीमित करना है। 

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान भी पीछे नहीं हटा। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी सहयोगी देशों में स्थित ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि यह हमला अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का प्रत्यक्ष जवाब है और यदि अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसका जवाब और भी व्यापक होगा। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के साथ लागू अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने संघर्ष विराम की भावना का उल्लंघन करते हुए समुद्री जहाजों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में अमेरिकी सैनिकों, सहयोगी देशों या अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर फिर हमला हुआ तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा और वैश्विक समुद्री मार्गों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ तनाव का सबसे बड़ा केंद्र इस समय **होर्मुज जलडमरूमध्य** बना हुआ है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग विश्व ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यहां सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं तथा वैश्विक महंगाई में भी वृद्धि हो सकती है। 

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव केवल हाल की घटनाओं तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के रिश्तों में दशकों से अविश्वास बना हुआ है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय प्रभाव, इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में दोनों देशों के विरोधी हित समय-समय पर इस तनाव को बढ़ाते रहे हैं। हाल के घटनाक्रम ने इन पुराने मतभेदों को एक बार फिर सैन्य टकराव के रूप में सामने ला दिया है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है। खाड़ी क्षेत्र के देशों में पहले ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कई देशों ने अपने हवाई सुरक्षा तंत्र सक्रिय कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर नई रणनीति बना रही हैं। 

संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक देशों ने अमेरिका और ईरान से संयम बरतने तथा कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें वाशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं,


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