होर्मुज़( Hormuz) पर फिर ईरान का शिकंजा, वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर बढ़ा संकट

By VNI India | Posted on 30th Jun 2026 | विदेश
होर्मुज़

नई दिल्ली  (वीएनआई) 30 जून, मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया है। हाल के दिनों में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों और सुरक्षा खतरों के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने जोखिम बढ़ने के कारण अपने जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर चिंता गहरा गई है।


होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है तथा फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस (LNG) का परिवहन इसी रास्ते से होता है। यही कारण है कि इस जलमार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।


मौजूदा संघर्ष की शुरुआत फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बढ़ा दिया और विदेशी जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद कई महीनों तक क्षेत्र में सैन्य तनाव, ड्रोन और मिसाइल हमले तथा समुद्री सुरक्षा संकट बना रहा।


लगातार बढ़ते तनाव के बीच 18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य युद्धविराम लागू करना, समुद्री व्यापार को सामान्य बनाना और आगे की वार्ता का रास्ता खोलना था। हालांकि समझौते के बावजूद कई प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं। ईरान का कहना है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाज उसकी शर्तों के अनुसार चलें, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग मानते हुए निर्बाध आवाजाही की वकालत कर रहे हैं।


हालिया घटनाक्रम के बाद समुद्री यातायात एक बार फिर प्रभावित हुआ है। कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जबकि बीमा कंपनियों ने जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिए हैं। एशिया, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है क्योंकि उनकी तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इससे महंगाई, परिवहन लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है। फिलहाल कतर, ओमान और अन्य मध्यस्थ देशों की पहल पर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जारी है, लेकिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है और पूरी दुनिया की नजरें इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर टिकी हैं।


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