नई दिल्ली (वीएनआई) 07 अगस्त भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा और पहला स्पेसवॉक सफलतापूर्वक पूरा किया। वे वर्ष 2021 में नासा के अंतरिक्ष यात्री दल के लिए चुने गए थे और जनवरी 2022 से उन्होंने कठोर अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण शुरू किया। जुलाई 2026 में वे रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रवाना हुए। उनके साथ रूसी कॉस्मोनॉट प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकीना भी मिशन का हिस्सा हैं। यह लगभग आठ महीने का अभियान है, जिसमें वे वैज्ञानिक अनुसंधान और नई अंतरिक्ष तकनीकों के परीक्षण पर कार्य कर रहे हैं।
मिनेसोटा (अमेरिका) में जन्मे डॉ. अनिल मेनन के पिता भारतीय मूल के हैं, जिनकी जड़ें केरल से जुड़ी हैं, जबकि उनकी माता यूक्रेनी मूल की हैं। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री तथा डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एम.डी.) की पढ़ाई पूरी की। आगे चलकर उन्होंने एयरोस्पेस मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल की और आपातकालीन चिकित्सा (इमरजेंसी मेडिसिन) के विशेषज्ञ चिकित्सक बने।
डॉ. मेनन अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल भी हैं। उन्होंने अमेरिकी वायुसेना में फ्लाइट सर्जन के रूप में कार्य किया, 100 से अधिक एफ-15 उड़ानों में हिस्सा लिया और गंभीर रूप से घायल सैनिकों के उपचार एवं एयर ट्रांसपोर्ट मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने हैती और नेपाल में आए विनाशकारी भूकंपों के दौरान राहत कार्यों में चिकित्सकीय सेवाएं दीं तथा अफगानिस्तान में भी मानवीय मिशनों का हिस्सा रहे। पर्वतारोहण के शौकीन मेनन एवरेस्ट क्षेत्र में पर्वतारोहियों को चिकित्सा सहायता भी प्रदान कर चुके हैं।
वर्ष 2014 में वे नासा में फ्लाइट सर्जन के रूप में शामिल हुए और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के कई अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने रूस के स्टार सिटी में छह महीने से अधिक समय तक रहकर सोयुज अभियानों के लिए प्रशिक्षण और चिकित्सा सहयोग भी दिया। वर्ष 2018 में वे स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन बने। उन्होंने कंपनी के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन डेमो-2 की चिकित्सा तैयारियों का नेतृत्व किया, मानव अंतरिक्ष उड़ान चिकित्सा कार्यक्रम विकसित किया तथा निजी अंतरिक्ष यात्राओं और स्टारशिप कार्यक्रम से जुड़े अनुसंधानों में भी योगदान दिया।
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर डॉ. मेनन सेमीकंडक्टर क्रिस्टल निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चिकित्सा तकनीकों, अल्ट्रासाउंड, माइक्रोग्रैविटी में रक्त प्रवाह, बायोप्रिंटिंग तथा अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं। इन शोधों का उद्देश्य भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों को सुरक्षित बनाना तथा पृथ्वी पर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना है।
अगस्त 2026 में उन्होंने वरिष्ठ नासा अंतरिक्ष यात्री जेसिका मेयर के साथ अपना पहला लगभग साढ़े छह घंटे का स्पेसवॉक भी सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान दोनों ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की विद्युत प्रणाली को उन्नत करने और अगली पीढ़ी के सौर पैनलों की स्थापना की तैयारियों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य किए। यह उपलब्धि भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है।
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