नई दिल्ली/तेहरान, 6 जुलाई (वीएनआई), ईरान आज सुन्न सा पड़ा एक ऐसा मंजर देख रहा हैं जो शायद किसी को भी देखना ना पड़े. तेहरान की सड़कों पर शोक के काले लिबास में महिलायें पुरूष, बच्चे, बुजुर्गु सभी रो रहे हैं, क्रंदन कर रहे हैं. देश के राष्ट्रपति से ले कर सेना प्रमुख और ईरान का समूचा राजनैतिक नेतृत्व, सैन्य अधिकारी, विशिष्ट लोग सभी की ऑखे नम हैं, हर आमो- खास सभी सुबक रहे हैं. यह मंजर हैं ईरान क पूर्व सर्वोच्च नेता सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह की अंतिम विदाई का, एक ऐसी विदाई जो अपने आप में एक इतिहास का एक अमिट अध्याय बन जाये. इसराइल और अमेरिका ने गत २28फरवरी को एक हमले में उन्हें मार दिया उसी दिन से उनका ्शव सुरक्षित रखा हुआ था 4 महीने बाद 3 जुलाई को पहली बार ्खामनेयी , उनकी पत्नी। बेटी दामाद, नवासी का पार्थिव शरीर आम लोगों के बीच आया तो उनका शव जब ग्रैन्ड मुस्सल्ला मस्जिद पहुंचा तो 2 लाख से ज्यादा लोग काले लिबास मे रो रहे थे बदला, बदला का नारा लगाते हुयेचिल्ला रहे थे और कुछ ने मानो अचेतन सी देह से अपने नेता को देह को फिर देख नही पाने के ख्याल से खामोशी मे डूब गए थे. दरसल लग रहा था कि जनता के हुजूम के सब्र का बॉध मानों ढह गया हो. अपने प्रिय नेता को ऑसूओं के सैलाब में डूब कर अंतिम विदाई देने के साथ ्ही ईरान की अमरीका और इजरायल के आगे खुटने नही टेकने, ईरानी जनता की एक जुटता और दुनिया को यह संदेश देना कि वह भी एक बड़ी ताकत है और दुनिया को यह संदेश देना हैं कि अमरीका से युद्ध के बावजूद वह अलग थलग नही पड़ा हैं. उस के मित्र देशों के इस शोक के अवसर पर उनके साथ खड़ा होने से समझा जा सकता हैं. इस अवसर पर रूस, चीन जैसे देशों सहित लगभग 100 देशों का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस बात का ्प्रतीक था कि ईरान वो नहीं है जिसे अमरीका, इजरायल ने युद्ध से पहले सोचा थाइससे पहले कोई नहीं सोच सकता था कि ्वहअमेरिका से लड़ सकता है और उसे धूल चटाई जा सकती है और उसे बातचीत को मजबूर कर देगा
ईरान शोक और साहस के समंदर में तब्दील हो गया है धरती नजर नहीं आ रही थी तेहरान के ग्रैंड मुस्सल्ला में औरत आदमी बुजुर्ग बच्चे नौजवान विषाद के माहौल मे थे पहली बार खमनेयी के चार बेटो में तीन बेटे भी रोते हुए भावुक हेट हुए मौजूद थे यह अंतिम यात्रा ईरान और इराक के कर्बलाशहर समेतपांच शहरों से गुजरते हुए 3000 किलोमीटर तक का सफर तय करेगी, 9 जुलाई को अयातुल्लाह अली खामनेयी केपैतृक नगर मशहर में इस यात्रा का आखिरी पड़ाव होगा मशहर के इमाम रज़ा दरगाह में उन्हें सुपुर्दे खाक किया जाएगा यानि माटी की देह को माटी मॉ को सुपुर्द कर दिया जायेगा
एक अनुमान के मुताबिक इस शव यात्रा में लगभग 2 करोड लोगों के शामिल होने की संभावना है। ईरानी मामलों के एक जानकार के अनुसार ईरान एक मुल्क नहीं है सब एक परंपरा है एक ऐसी परंपरा जहां कर्बला के सबक इम्तिहान पास करने की नहीं अपितु जिंदगी जीने के फल सफे हैं,जहा फर्जी राष्ट्रवाद उन के लिये सिर्फ भाषण बाजी नहीं. यह यात्रा उस जज्बे को भी सलाम करने की हैं जहा ईरान ने कठपुतली के हवाले कर देंगे इस मौके पर ईरान दुनिया को बता रहा है कि हमारे टुकड़े करने का मंसूबा रखने वालों अंतिम यात्रा में भारत समेत करीब 100 देश के प्रतिनिधियों की मौजूदगी और लाखों लोगों कीवैश्विक समर्थन के प्रदर्शन के तौर पर बिहार के राज्यपाल, सैयद अ ता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र के शामिल होने के अलावा पीडीपी लीडर महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद भी पहुंचे वहीं फिलिस्तीन कज़ाख़िस्तान कब्रिस्तान अफगानिस्तान सैयद अतः हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे इसके अलावा पीडीपी लीडर महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीदभी पहुंच गई फिलिस्तीन कज़ाख़िस्तान कर्रिस्तान इराक रूस उज़्बेकिस्तान अफगानिस्तान के नेता इसमें हिस्सा लेने पहुंचेनेशनल पीपुल्स कांग्रेसकी स्थाई सुबह रखना चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थाए समिति जोतीन यानी की अंतिम यात्रा में हाजिरी लगान कॉम के शहर के जुम्मे की नमाज के इमाम अयातुल्लाह मोहम्मद शहीदी ने कहा कि अंतिम यात्रा ईरान के लिए और जनमत संग्रह जैसी साबित हो अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के बावजूद ईरान मजबूती से खड़ा हैं.
कुछ विदाइयाँ शोक की सीमाओं से आगे बढ़कर इतिहास, भावनाओं और जनविश्वास का दस्तावेज़ बन जाती हैं। उनमें शामिल लोगों की आँखों में आँसू होते हैं, होंठों पर प्रार्थनाएँ होती हैं और दिलों में अनगिनत यादें।
ऐसे ही किसी क्षण में जब किसी बड़े सार्वजनिक व्यक्तित्व का पार्थिव शरीर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाता है, तो सड़कों पर उमड़ने वाली भीड़ केवल एक इंसान को विदाई देने नहीं आती। वहाँ हर चेहरा अपनी-अपनी स्मृतियाँ लेकर पहुँचता है। किसी के लिए वह एक नेता होता है, किसी के लिए मार्गदर्शक, किसी के लिए संघर्ष का प्रतीक और किसी के लिए अपने समय का सबसे प्रभावशाली चेहरा।
हजारों नहीं, लाखों लोगों का एक साथ सड़कों पर उतरना केवल संख्या का प्रदर्शन नहीं होता। वह उस भावनात्मक रिश्ते का संकेत होता है, जो किसी सार्वजनिक व्यक्तित्व और समाज के बीच वर्षों में बनता है। भीड़ की खामोशी भी कई बार शब्दों से अधिक मुखर होती है। कहीं सिसकियाँ सुनाई देती हैं, कहीं दुआएँ, कहीं मौन खड़े लोग अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते दिखाई देते हैं। यह शोर नहीं, सामूहिक संवेदना का शोक संगीत होता है।
ऐसे अवसरों पर दुनिया की निगाहें भी उस देश की ओर टिक जाती हैं। विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी, विभिन्न देशों से आए शोक संदेश और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कवरेज इस बात का संकेत होती है कि किसी सार्वजनिक व्यक्तित्व का प्रभाव उसकी सीमाओं से कहीं आगे तक फैला था। अंतिम संस्कार केवल एक राष्ट्रीय आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि वैश्विक चर्चा का विषय बन जाता है।
जहाँ पौने सात फुट के ताबूत मे बन्द अयातुल्लाह खामनेयी कि देह को जब ईरान की जनता ने कंधों पर उठाया तो आसमानों ने झुक कर उसका माथा सलाम किया उसकी बुलंदियों को एक जनाजा नहीं उठा है दुनिया से हिम्मत और हौसले की एक पूरी दुनिया खाली हो गई है'. ईरान ने37 वर्ष पूर्व अप्ने तत्कालीन सर्वोच्च नेता को भी ऐसे ही अंतिम विदाई थी, तब शोकाकुल लोगों के सब्र का बान्ध इस कदर टूटा कि उन के ताबूत को किसी तरह से भीड़ के जाल से निकाल कर हेलीकॉपटर के जरिये अंतिम पड़ाव पर लेया जा सका.ईरान ने अपने अपने पूर्व सर्वोच्च नेता क्प आखरी सलाम के जरियेइस बार भी नेतआ को आखरी सलाम इन्ही भावनाओं का इजहार किया हैं . वी एन आई
No comments found. Be a first comment here!