नई दिल्ली 4 जून ( वीएनआई ) हम जब भी अनानास की बात करते हैं, तो अधिकतर लोगों के मन में एक बड़े से काँटेदार और मीठे फल की छवि उभरती है, लेकिन भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में उगाई जाने वाली ‘क्वीन पाइनएप्पल’ अपनी अद्वितीय मिठास, मनमोहक सुगंध और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण दुनिया भर में विशेष पहचान बना चुकी है। यही कारण है कि इसे अनानास की ‘रानी’ कहा जाता है।
क्वीन पाइनएप्पल आकार में अपेक्षाकृत छोटा होता है, लेकिन स्वाद और सुगंध के मामले में इसका कोई मुकाबला नहीं। इसका गूदा सुनहरे पीले रंग का, रसदार और कम रेशेदार होता है, जिससे इसे ताजा खाने के लिए सर्वश्रेष्ठ किस्मों में गिना जाता है। त्रिपुरा की जलवायु और मिट्टी इस किस्म के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती है, जिसके कारण यहां पैदा होने वाले फलों की गुणवत्ता विशेष रूप से उत्कृष्ट होती है।
क्वीन पाइनएप्पल को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त है और इसे त्रिपुरा के राजकीय फल का दर्जा भी मिला हुआ है। यह केवल एक फल नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और कृषि विरासत का प्रतीक बन चुका है।
हाल के वर्षों में इसकी बढ़ती मांग ने हजारों किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। देश-विदेश के बाजारों में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है और इसे मध्य-पूर्व, यूरोप तथा अन्य देशों तक निर्यात किया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने और इस फल को वैश्विक ब्रांड बनाने के लिए ‘मिशन क्वीन पाइनएप्पल’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन सुविधाओं का और विस्तार किया जाए तो क्वीन पाइनएप्पल भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। यह फल न केवल स्वाद का खजाना है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक प्रगति और किसानों की समृद्धि का भी प्रतीक बनता जा रहा है।
क्वीन पाइनएप्पल की सफलता यह साबित करती है कि स्थानीय कृषि उत्पाद, यदि उन्हें उचित पहचान और बाजार मिले, तो वे वैश्विक मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
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