नई दिल्ली शोभना जैन (वीएनआई ) 26 अक्टूबर ब्राज़ील के वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने शानदार वापसी करते हुए बेहद नाटकीय अंदाज और कांटे की टक्कर में राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है. अस्सी बरस के 80 वर्षीय लीडर लूला को चौथी बार राष्ट्रपति बने है.
लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतंत्र में हुए चुनाव के दूसरे दौर में लूला को 51.76 फीसदी वोट मिले, जबकि जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति तथा दक्षिणपंथी जायर बोलसोनारो के बेटे फ्लावियो बोलसोनारो को 48.24 फीसदी वोट मिले. लिबरल पार्टी के नेता फ्लावियो बोलसोनारो कट्टर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं.
तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लूला की जीत ने आधुनिक ब्राजील के इतिहास के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में उनकी जगह को और मजबूत किया है. सार्वजनिक जीवन में लगभग पांच दशक बिताने के बाद यह जीत उनके राजनीतिक करियर की एक अहम उपलब्धि है. माना जा रहा हैं कि लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी दलों की चुनावी जीत के रुझान को पलटते हुए लूला की दोबारा जीत से इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की अमेरिकी महत्वाकांक्षाओं को झटका लगा है.पूर्व मेटल वर्कर लूला 1989 में पहली बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के बाद से ब्राज़ील में वामपंथ के सबसे प्रमुख नेता रहे हैं. इसके बावजूद, उन्हें अब अपने राजनीतिक जीवन की सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
उनका नया कार्यकाल पाँच जनवरी 2027 से शुरू होने वाला है. लेकिन इस बार खास कर उन्हें अपने कार्यकाल में देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी चुनौतियां झेलनी होगी. इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराज़गी भी शामिल है.पिछले साल से अमेरिका ने ब्राजील पर व्यापार शुल्क और अन्य प्रतिबंध लगाए हैं.
ट्रंप ने लूला के प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो का सीधे तौर पर समर्थन नहीं किया था. हालांकि, उन्होंने कोलंबिया और होंडुरास में राष्ट्रपति चुनाव जीतने वाले दक्षिणपंथी उम्मीदवारों का समर्थन किया था. लेकिन माना जा रहा हैं कि अमेरिकी प्रशासन 21.3 करोड़ आबादी वाले ब्राजील की सत्ता में किसी रूढ़िवादी नेता को देखना अधिक पसंद करता.व्हाइट हाउस लैटिन अमेरिका को अमेरिकी प्रभाव का क्षेत्र मानता है. ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इस क्षेत्र में ऐसे नेता सत्ता में रहें, जो रक्षा, सुरक्षा और व्यापार समेत विभिन्न मुद्दों पर उसकी नीतियों का समर्थन करें.
पूर्व ट्रेड यूनियन नेता लूला ने डोनाल्ड ट्रंप की "आक्रामक विदेश नीति" की आलोचना की है, जबकि बोल्सोनारो ने व्हाइट हाउस में अपने वैचारिक सहयोगी के साथ करीबी संबंध बनाने का वादा किया था. ब्राज़ील तेल के समृद्ध भंडार वाला देश है और यहाँ रेयर अर्थ मिनरल्स का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा भंडार मौजूद है. दक्षिण अमेरिका में ब्राजील एकमात्र बड़ा देश है, जहाँ दक्षिणपंथी नेता सत्ता में नहीं है. लूला को बड़े पैमाने पर चीन के प्रति दोस्ताना रुख़ रखने वाला नेता माना जाता है.
फ्लावियो बोल्सोनारो ने ब्राजील को अमेरिका के और करीब लाने का वादा किया था. वहीं, लूला ने अमेरिका को चुनाव में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी थी. उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि ब्राज़ील "कभी भी किसी का पिछलग्गू नहीं बनेगा".
हालांकि, लूला की जीत से व्हाइट हाउस में निराशा हो सकती है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों ने इसका स्वागत किया है. उन्हें आशंका थी कि बोलसोनारो की जीत से ब्राजील के प्रभावशाली कृषि व्यवसाय और खनन क्षेत्रों की ताकत बढ़ जाती. मेटल इंडस्ट्री में काम कर चुके लूला ने पहली बार 2003 से 2010 तक देश की सरकार का नेतृत्व किया था. इस दौरान उन्होंने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं, जिससे गरीबी कम करने में मदद मिली.
दिलचस्प बात यह हैं कि उनके चुनावी सर्वे में बोल्सोनारो को मामूली बढ़त दे दी गई थी.हार के बाद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजों को मानने से मना कर दिया है. बोलसोनारो नतीजों को 'असंभव' बताते हुए 'समझ से परे' बताया है. उन्होंने लूला की जीत को स्वीकार करने से इनकार किया और चुनाव नतीजे रद्द करने की मांग की. गौरतलब हैं कि फ्लावियो के पिता जाएर बोलसोनारो भी 2022 में चुनाव में अपनी हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
वामपंथी नेता लूला इससे पहले 2003 से 2010 तक राष्ट्रपति रह चुके हैं. चार साल पहले उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया.हालांकि, रविवार को हुये मतदान को लेकर कुछ विवाद भी रहे सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने मतदान केंद्रों के बंद होने का निर्धारित समय क़रीब आने पर मतदान की अवधि दो घंटे बढ़ाने का आदेश दिया.यह फ़ैसला लूला के गठबंधन की उन शिकायतों के बाद आया, जिनमें कई राज्यों में सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी समस्याओं का ज़िक्र किया गया था. ब्राज़ील के कई नागरिक मतदान केंद्रों तक पहुँचने के लिए सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं.
व्हाइट हाउस लैटिन अमेरिका को अमेरिकी प्रभाव का क्षेत्र मानता है. ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इस क्षेत्र में ऐसे नेता सत्ता में रहें, जो रक्षा, सुरक्षा और व्यापार समेत विभिन्न मुद्दों पर उसकी नीतियों का समर्थन करें. पूर्व ट्रेड यूनियन नेता लूला ने डोनाल्ड ट्रंप की "आक्रामक विदेश नीति "की आलोचना की है, जबकि बोल्सोनारो ने व्हाइट हाउस में अपने वैचारिक सहयोगी के साथ क़रीबी संबंध बनाने का वादा किया था.
ब्राज़ील तेल के समृद्ध भंडार वाला देश है और यहाँ रेयर अर्थ मिनरल्स का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा भंडार मौजूद है. दक्षिण अमेरिका में ब्राजील एकमात्र बड़ा देश है, जहाँ दक्षिणपंथी नेता सत्ता में नहीं है. लूला को बड़े पैमाने पर चीन के प्रति दोस्ताना रुख़ रखने वाला नेता माना जाता है.
फ्लावियो बोल्सोनारो ने ब्राजील को अमेरिका के और करीब लाने का वादा किया था. वहीं, लूला ने अमेरिका को चुनाव में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी थी. उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि ब्राज़ील "कभी भी किसी का पिछलग्गू नहीं बनेगा".
हालांकि, लूला की जीत से व्हाइट हाउस में निराशा हो सकती है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों ने इसका स्वागत किया है. उन्हें आशंका थी कि बोलसोनारो की जीत से ब्राजील के प्रभावशाली कृषि व्यवसाय और खनन क्षेत्रों की ताकत बढ़ जाती.
शुरुआती दौर में फीके रहे चुनाव प्रचार के बाद लूला ने पहले चरण के मतदान के नतीजों के बाद कई तरह की राहतों की घोषणा की. इनमें क़र्ज़ माफ़ी, वीकेंड में मुफ़्त सार्वजनिक परिवहन और गरीब छात्रों के लिए वित्तीय सहायता शामिल थीं. इस पर विपक्ष ने मौजूदा राष्ट्रपति लूला पर वोट खरीदने का आरोप लगाया
फ्लावियो बोलसोनारो के पिता जायर बोलसोनारो को पिछले साल 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में दोबारा जीत हासिल करने की नाकाम कोशिश के बाद तख्तापलट की साजिश रचने का दोषी पाया गया था. जायर बोलसोनारो फिलहाल 27 साल की सजा काट रहे हैं. स्वास्थ्य कारणों से उन्हें इस समय घर पर रखा गया है.
मेटल इंडस्ट्री में काम कर चुके लूला ने पहली बार 2003 से 2010 तक देश की सरकार का नेतृत्व किया था. इस दौरान उन्होंने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की, जिससे गरीबी कम करने में मदद मिली.
बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें जेल जाना पड़ा. हालांकि, बाद में रिहा कर दिया गया था. इसके बाद चार साल पहले उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को हराकर सक्रिय राजनीति में वापसी की.
विपक्षी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो की हार उनके पिता की ओर से क़रीब एक दशक पहले शुरू किए गए कट्टर लोकलुभावन राजनीतिक आंदोलन के लिए झटका है. यह आंदोलन अब ब्राज़ील की राजनीति में दक्षिणपंथ का सबसे प्रभावशाली धड़ा बन चुका है.