नोटबंदी को लेकर आज भी संसद की कार्यवाही भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच ठप्प

By Shobhna Jain | Posted on 24th Nov 2016 | VNI स्पेशल
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नोटबंदी को लेकर आज भी संसद की कार्यवाही भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच ठप्प नई दिल्ली,२४ नवंबर (वी एन आई)नोटबंदी को लेकर आज भी संसद की कार्यवाही भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच ठप्प रही और एक्जुट विपक्ष ने दोनो सदनो मे अपने मुद्दो पर सरकार से जबाव मॉगते हुए संसद नही चलने दी. राज्य सभा मे आज भी विपक्ष के सदस्य इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान प्रधान मंत्री की मौजूदगी की मॉग पर अड़े रहे, प्रधान मंत्री के सदन मे प्रशन काल के बाद सदन मे वापस नही लौटने पर विपक्ष ने भारी विरोध व्यक्त किया इससे पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह ने प्रधान मंत्री की मौजूदगी मे चर्चा की शुरूआत कर दी थी लेकिन भोजन काल के बाद फिर सदन मे प्रधान मंत्री के नही लौटने पर सदन की कार्यवाही फिर ठप्प हो गई. अन्तत दो बार के स्थगन के बाद राज्य सभा की कार्यवाही कल तक के लिये स्थगित कर दी गई.लोक सभा की बैठक भी विपक्ष के सदन मे स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराये जाने की मॉग पर अड़े रहने की वजह से नही चल सकी और बैठक दिन भर के लिये स्थगित कर दी गई. इससे पूर्व नोटबंदी को ले कर देश के कई हिस्सो मे फैली अफरातफरी पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सभा मे नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 'नोटबंदी सबसे बड़ा कुप्रबंधन है,इससे अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई है, जी डी पी के गिर कर दो प्रतिशत कम होने का अंदेशा है.पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने चर्चा के दौरान कहा कि नोट बंदी आफत की तरह देश में आया जिससे करीब 60-65 लोगों की जान चली गई उन्होने कहा कि इसके उद्देश्यों को लेकर असहमत नहीं हूं, लेकिन इसके क्रियान्वन मे बहुत बड़ा कुप्रबंधन देखने को मिला,आरबीआई और पीएमओ इसे लागू करने में पूरी तरह फेल रहे नोटबंदी में अमल में काफी अव्यवस्था दिख रही है. बदइंतजामी से लोग परेशानी हैं. पीएम को इस योजना को रचनात्मक तरीके से लाना चाहिए था. पीएम ने लोगों से 50 दिन मांगे हैं, जो ्गरीब लोगों पर बहुत ही भारी पड़ेंगे और काफी विनाशकारी प्रभाव वाले हैं उन्होने सवाल पूछा "क्या आपने ऐसा किस देश में सुना है कि पैसा जमा कराने के बाद निकालने की इजाजत नहीं होती ?" ्श्री सिंह ने कहा कि इससे देश के लोगों का देश की बैंकिंग और करंसी सिस्टम में विश्वास कम होगा. नोटबंदी से आम लोगों को हो रही तकलीफों की तरफ ध्यान दिया जाना चाहिए. कृषि, छोटे उद्योगों और असंगठित क्षेत्र के लोगों को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होने कहा कि इस फैसले के बाद प्रति दिन नए नियम बनाना सही नहीं है. नियमों में हर दिन हो रहा बदलाव प्रधानमंत्री कार्यालय और भारतीय रिजर्व बैंक की खराब छवि दर्शाता है. उन्होने कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री पीड़ितों को राहत देने के लिए व्यावहारिक कदम निकालेंगे. .राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा-यह पहली बार हो रहा है कि प्रधानमंत्री खुद नहीं आ रहे. वह इस पर स्टेटमेंट नहीं दे रहे हैं. आपने बिना तैयारी के नोटबंदी लागू की. इससे आम आदमी परेशान है. उन्हें इस पर बयान देना चाहिए. वह सिर्फ बीजेपी के ही नहीं, हमारे भी पीएम हैं. हम प्रधानमंत्री को कब सुनेंगे. सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि यह फैसला यूपी चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया. आपकी जितनी करेंसी उसका 10 प्रतिशत दे पाए. वित्तमंत्री को भी भरोसे में न लेना कितना सही है. यही नहीं काली स्याही लगाने का निर्णय भी पूरी तरह गलत है. बहुजन पार्टी की सुश्री मायावती और तृण मूल पार्टीके डेरेक ब्रायन ने भी नोटबंदी पर सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि देश मे अफरा तफरी फैली है और प्रधान मंत्री संसद मे चर्चा के लिये आते ही नही है उधर, नोटबंदी को लेकर लोकसभा में भी हंगामा हुआ. संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्षी समाजवादी पार्टी के सांसद अक्षय यादव ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की आसन की तरफ कागज ्फाड कर उस के टुकड़े फेंक दिए. इससे गुस्साई लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी नोटबंदी के मुद्दे पर लोक सभा मे सरकार का कहना है कि वह नियम 193 के तहत चर्चा कराने को तैयार है. हालांकि विपक्षी दल कार्य स्थगित करके चर्चा कराने की मांग पर अड़े हुए हैं. लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि लोग चाहते हैं कि सदन चले, चर्चा हो. लोग विपक्ष की राय भी सुनना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश की गरीब जनता के हित में यह निर्णय लिया है. विपक्ष कार्य स्थगित करके चर्चा कराने की मांग पर अड़ा है, लेकिन कार्यस्थगन तभी होता है जब अचानक से कुछ हुआ हो. 18 दिसंबर को खत्म हो रहे संसद के शीत सत्र के दौरान सरकार को कई अहम बिल पास कराने हैं. इसमें बड़े आर्थिक सुधार से संबंधित जीएसटी से जुड़े दो बिल भी हैं. अप्रैल 2017 में जीएसटी को लागू कराने के लिए सरकार को इस सत्र में यह बिल पास कराना जरूरी है. इन बिलों को पास कराने के लिए सरकार को विपक्षी दलों का समर्थन चाहिए, खासकर राज्यसभा में जहां यह अल्पमत में है.वी एन आई

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