कोलंबो, श्रीलंका 13 मार्च (शोभनाजैन,वीएनआई) श्रीलंका यात्रा पर आज यहा पहुंचे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहा एक समारोह मे बोद्ध भिक्षुओ को \'दान दक्षिणा \'दी, और श्रीलंका के नागरिको को \'पर्यटक वीजा ऑन एराइवल\' सहित दोनो देशो की जनता के बीच नजदीकियां बढाने के लिये अनेक \'तोहफो\' की घोषणाये की . प्रधानमंत्री ने कहा कि आगामी 14 अप्रैल से श्रीलंका के तमिल और सिंहली नव वर्ष के मौके पर श्रीलंकाई नागरिकों को \'वीजा ऑन अराइवल\' की सुविधा मिलनी शुरू हो जायेगी.
प्रधान मंत्री हिंद महासागर क्षेत्र के तीन मित्र पड़ोसी देशो सेशल्स, मॉरीशस और श्रीलंका यात्रा के अंतिम चरण मे आज दो दिवसीय यात्रा पर यहा पहुंचे. 28 वर्ष बाद किसी भारतीय प्रधान मंत्री की यह \'पहली द्विपक्षीय श्री लंका यात्रा\' है, भौगोलिक नजदीकियो, ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधो और साझे मूल्यो की डोर से बंधे भारत तथा श्रीलंका मे इस यात्रा को खासा अहम माना जा रहा है . श्रीलंका मे नागरिको द्वारा श्री मोदी का स्वागत किये जाने के साथ यहां के मीडिया मे भी यह यात्रा खासी सुर्खिया बना रही है
प्रधानमंत्री मोदी आज शिष्ट मंडल स्तर की वार्ता और दोनो देशो के बीच सहयोग बढाने के चार समझौते किये जाने के बाद राजधानी कोलंबो स्थित महाबोधि सोसायटी के एक कार्यक्रम मे गये। वहां उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं से चर्चा के बाद उन्हे \'दान दक्षिणा\' दी और आशीर्वाद लिया.प्रधान मंत्री ने कार्यक्रम मे भारत तथा श्री लंका के बौद्ध धर्म से जुड़े सदियो पुराने सांस्कृतिक संबंधो की चर्चा करते हुए कहा कि बौद्ध धर्म दोनो देशो को जोड़ता है. उन्होने कहा कि आज दुनिया को जिस तरह से आतंकवाद भयभीत कर रहा है, महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाया गया रास्ता ही हमे आतंक से मुक्ति दिला सकता है, उन्होने कहा कि दरअसल श्रीलंका बौद्ध धर्म का पालन करने वाला सबसे पुराना देश है. श्री मोदी ने महाबोधि सोसायटी में कहा मै\' यहां आकर बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहे हूं, भिक्षुओ ने उन्हे सांची अवशेषो के दर्शन करने का सौभाग्य दिया.\'उन्होंने कहा कि आम धारणा है कि बौद्ध धर्म केवल पूर्व की ओर बढ़ा है, बल्कि यह उनके पश्चिमी राज्य गुजरात विशेषकर उनके गांव वडनगर में भी इस धर्म का बहुत प्रभाव रहा है. श्री मोदी ने कहा कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने बौद्ध धर्म पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का वहा आयोजन किया था.उन्होंने महाबोधि सोसायटी में एक पौधा भी बिरवा भे रौपा.
प्रधान मंत्री ने दोनो देशो की जनता के बीच आपसी संपर्क बढाने के लिये नई दिल्ली और कोलंबो के बीच एयर इंडिया की सीधी विमान सेवा भी शुरू किये जाने का एलान किया.दोनो देशो के बीच के साझा सांस्कृतिक विरासत वाले संबंधो को और मजबूत बनाये जाने के क्रम मे उन्होने कहा कि भारत श्रीलंका मे \' रामायण से जुड़े स्थलो के सर्किट\' और भारत मे \'बौद्ध सर्किट\'बनाये जाने मे सहयोग देगा . उन्होने कहा\' जनता हमारे संबंधो की धुरी है हमने जनता के बीच संपर्क को बढावा देने,संपर्क माध्यम बढाने और पर्यटन को बढावा देने के लिये अनेक फैसले किये है. हम इस वर्ष श्रीलंका मे \'भारत महोत्सव\' का आयोजन करेंगे, जिसमे बौद्ध् पंरपरा संबंधी एक प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी दोनो देशो के बीच हुए चार समझौतो मे सीमा शुल्क, वीजा, युवा विकास के साथ गुरूदेव रविन्द्र नाथ टेगोर की स्मृति मे श्री लंका मे स्मारक बनाये जाने के बारे मे भी एक समझौता है.
इस दौरे मे जनता के बीच संपर्क बढाने,आर्थिक् संबंध बढाने के साथ ही रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण इस पडोसी देश के साथ गठजोड मजबूत करने के उद्देश्य से कई कदमों की घोषणा की गई. प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना से अलग से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा की. बाद मे श्रीलंका की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,\' हमारा भाग्य आपस में जुड़ा हुआ है।\'दोनो देशो के बीच हुई शिष्टंडल स्तर् की वार्ता और समझौतो के बाद प्रधान मंत्री मोदी ने \'वार्ता \'को \'अत्यंत लाभप्रद\' बताते हुए वे दोनो देशो के भावी संबंधो को लेकर बहुत आशान्वित है और इ्न्हे ले कर उनका भरोसा बढा है. विदेश सचिव श्री एस जयशंकर ने भी प्रधान मंत्री की श्रीलंका यात्रा को \'बेहद सफल\' बताया और कहा कि आज लिये गये फैसलो से दोनो देशो के बीच संपर्क और बढेगा.
श्रीलंका की नव निर्वाचित मैत्रीपाला सिरीसेना सरकार के भारत के साथ रिश्ते और प्रगाढ बनाने की इच्छा और पहल के मद्देनजर प्रधान मंत्री मोदी की इस यात्रा को दोनो देशो के बीच रिश्तों के नये अध्याय की शुरूआत बतौर देखा जा रहा है.गत जनवरी मे मैत्रीपाला सरकार के गठन के बाद दोनो देशोके बीच तीन माह मे यह चौथा उ्च्चस्तरीय संपर्क है दोनो शिखर नेताओ के बीच यह दूसरी शिखर बैठक थी. श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला ने इस जनवरी हुए चुनाव के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिये भारत को ही चुना था और इस दौरान गत माह उनकी भारत यात्रा के दौरान भारत पर भरोसा जताते हुए श्रीलंका ने भारत के साथ द्विपक्षीय असैन्य परमाणु सहयोग संधि की, जो श्रीलंका की किसी देश के साथ पहली इस तरह की संधि थी है इससे पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसी माह और श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगला समरवीरा ने अपने सरकार बनने के दस दिन के भीतर भारत यात्रा की थी जिसे दोनो देशो के बीच रिश्तों को एक नया रंग देने बतौर देखा जा रहा है.
प्रधान मंत्री कल उत्तरी श्रीलंका में जाफना भी जाएंगे जहां 1980 के दशक में गृहयुद्ध चला और लिट्टे और श्रीलंका सरकार के बीच कभी भीषण संघर्ष हुआ था। श्री मोदी जाफना जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। वे जाफना में भारत की सहायता और सहयोग से चलाए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा लेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इस यात्रा से दोनो देशो को शीर्ष स्तर पर निकट राजनैतिक संपर्क बढाने,सहयोग बढाने के साथ समान हित वाले प्रमुख मुद्दो पर आपसी समझ बूझ कायम करने का मौका मिलेगा. तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी ने 1987 मे श्रीलंका का दौरा किया था जिस दौरान उन्होने भारत श्रीलंका शांति करार किया था, बाद मे प्रधानमंत्री भारतीय शांति सेना के स्मारक भी गये जहां उन्होने सैनिकों की प्रर्ति श्रद्धा सुमन अर्पित किये .वी एन आई