नई दिल्ली, 19 मार्च, (वीएनआई) आज से हिंदू धर्म के अनुसार चैत्र नवरात्रि का पर्व आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज यानी 19 मार्च गुरुवार से होगी और इसका समापन 27 मार्च शुक्रवार को होगा. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. हर दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित होता है और उसी के अनुसार भक्त पूजा-अर्चना करते हैं. इन दिनों श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मां दुर्गा की आरती करते हैं और घरों में कलश स्थापना कर देवी का आह्वान करते हैं. नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि का भी विशेष महत्व होता है, जब कन्या पूजन किया जाता है.
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की होती. इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण 'शैलपुत्री' कहा गया है. ये मां दुर्गा का पहला स्वरूप हैं, जो स्थिरता, शक्ति और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती हैं. उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल का फूल होता है, और वे वृषभ (बैल) पर सवारी करती हैं. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए आपको एक पान के पत्ते में 21 लौंग रखकर मां को अर्पित करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता को प्रसन्न करता है और मां आपकी मनोकामनाएं पूरी कर सकती हैं.
मान्यताओं के अनुसार, एक बार प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रण मिला लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया. तब भगवान शिव ने मां सती से कहा कि यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया है लेकिन मुझे नहीं, ऐसे में मेरा वहां पर जाना सही नहीं है. माता सती का प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकर ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी. सती जब घर पहुंची तो उन्हें केवल अपनी मां से ही स्नेह मिला. उनकी बहनें व्यंग्य और उपहास करने लगीं जिसमें भगवान शिव के प्रति तिरस्कार का भाव था.
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