नई दिल्ली 13 मार्च (शोभनाजैन/वीएनआई )भारत एवं पाकिस्तान के बनते बिगडते रिशतो के बीच आगामी 17 मार्च को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के विदेशी मामलो के सलाहकार सरताज अजीज नेपाल के पोखरा मे दक्षेस देशो के विदेश मंत्री सम्मेलन मे एक ही मंच पर मौजूद होंगे, लेकिन इस मंच से हटकर दोनो के बीच क्या वहा कोई द्विपक्षीय अथवा शिष्टाचार वश कोई छोटी सी मुलाकात होगी, जिससे द्विपक्षीय संबंधो के 'कुछ' आगे बढने का कोई रास्ता निकले इसे लेकर अटकलो का बाजार गर्म है.दरअसल पाकिस्तान स्थित आतंकी गुट 'जैशे मोहम्मद' द्वारा पठानकोट मे किये गये आतंकी हमले मे पाकिस्तान द्वारा हमले के दोषी और साजिश के सरगना आतंकी हाफिज सईद सहित अन्य के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही नही किये जा्ने की वजह से दोनो देशो के संबंधो मे फिर् से बढी तल्खी के चलते हालांकि अभी तक दोनो देशो के बीच अरसे से ठप्प पडी समग्र वार्ता को फिर से पटरी पर लाने का माहौल नही बन पा रहा है. लेकिन संभावना यह भी जताई जा रही है कि है कि इस बैठक के दौरान दोनो देश सचिवों की बीच वार्ता हो सकती है और सम्भवत इसके बाद विदेश मंत्री सम्मेलन के लिये वहा मौजूद दोनो देशो के शीर्ष प्रतिनिधियो के बीच भी मुलाकात हो . गौरतलब है कि जहां दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संघ (दक्षेस) की यह अहम बैठक कल से शुरू हो रही है। पोखरा में 14 से 17 मार्च के बीच दक्षेस सदस्यों की मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश सचिव एस. जयशंकर इसमें शामिल होंगे।
इस बैठक में श्री सरताज अजीज के साथ पाकिस्तान के विदेश सचिव ऐजाज़ अहमद चौधरी भी मौजूद होंगे। तीन माह के अंतराल के बाद दोनों पक्षों के नेता एवं अधिकारी औपचारिक संपर्क एवं संवाद के लिये एक दूसरे से रूबरू होंगे। लेकिन पठानकोट हमले के बाद के हालात में दोनों पक्षों के मध्य एक दूसरे की तरफ आगे बढते कदमो को इस हमले की वजह से जिस तरह से धक्का लगा ऐसे मे एक बार फिर इस मुलाकात को ले कर कयास लगाये जा रहे है
गौरतलब है कि डॉ. जयशंकर की पाकिस्तानी विदेश सचिव से 14 जनवरी को मुलाकात होनी थी लेकिन दो जनवरी को भारतीय वायुसेना के पठानकोट अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले के कारण पूरी शांति प्रक्रिया गड़बड़ा गयी थी जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लाहौर की 25 दिसंबर की आकस्मिक यात्रा के साथ शुरू हुई थी।
हालांकि इससे पहले दोनो देशो के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की छह दिसंबर को बैंकाक बैठक और विदेश मंत्री श्रीमती स्वराज की आठ-नौ दिसंबर को इस्लामाबाद यात्रा के दौरान इसकी पृष्ठभूमि तैयार कर ली गयी थी। इस दौरान समग्र शांति वार्ता को कुछ अन्य मुद्दों को जोड़ कर ‘व्यापक समग्र संवाद’ का नाम दिया गया।