नई दिल्ली, 21 मार्च, (वीएनआई) चैत्र चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की उपासना की जाती है, जिसे शक्ति और संतुलन का प्रतीक माना जाता है. है चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हुई और इसका समापन 27 मार्च शुक्रवार को होगा. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति का पृथ्वी पर विशेष प्रभाव रहता है. इस दिन की पूजा को मानसिक दृढ़ता और जीवन में स्थिरता से जोड़ा जाता है. भक्त मानते हैं कि श्रद्धा से की गई साधना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती
देवी चंद्रघंटा का स्वरूप शक्ति और शांति का अनोखा संगम माना जाता है. वे सिंह पर विराजमान होती हैं और उनके दस हाथों में विभिन्न शस्त्र होते हैं. माथे पर अर्धचंद्र उनके नाम का आधार है. उनका यह रूप यह संकेत देता है कि वे रक्षा और संतुलन दोनों का प्रतिनिधित्व करती हैं. देवी चंद्रघंटा की आराधना को साहस और धैर्य से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह अभ्यास व्यक्ति को तनाव से उबरने और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है.
नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह स्नान कर विधिपूर्वक देवी की पूजा करते हैं. साफ स्थान पर कलश स्थापित कर दीप, धूप और फूल अर्पित किए जाते हैं. भोग के रूप में दूध से बने पदार्थ जैसे खीर, मिष्ठान आदि चढ़ाना शुभ माना जाता है. यह परंपरा समृद्धि और शांति के प्रतीक के रूप में देखी जाती है. पूजा के दौरान मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया जाता है. नियमित और सही उच्चारण के साथ मंत्रों का जप ध्यान को केंद्रित करने में सहायक होता है. “ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः”“या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता…”
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