नई दिल्ली, 03 जुलाई, (वीएनआई) पुणे के बहुचर्चित * केतन अग्रवाल हत्याकांड* में शुक्रवार को हुई अदालत की सुनवाई को अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सुनवाई में से एक माना जा रहा है। 11 दिनों की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद मुख्य आरोपी *सिया गोयल*और उसके कथित प्रेमी *चेतन चौधरी* को लोनावला पुलिस ने वडगांव मावल कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने अदालत से दोनों की हिरासत बढ़ाने और वैज्ञानिक जांच के तहत पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराने की अनुमति मांगी। अदालत का फैसला जांच की अगली दिशा तय करेगा।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि अब तक की पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, लेकिन कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है, इसलिए डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक परीक्षण ही जांच की सबसे मजबूत कड़ी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सिया गोयल ने पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति जताई है, जबकि चेतन चौधरी के संबंध में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
एक हादसा, जो हत्या की साजिश निकला
18 जून 2026 को पुणे के 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी *केतन अग्रवाल*अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोनावला स्थित ऐतिहासिक *लोहागढ़ किले* घूमने गए थे। कुछ ही देर बाद केतन लगभग 400 फीट गहरी खाई में गिर गया और उसकी मौत हो गई। शुरुआती जांच में इसे दुर्घटना माना गया, लेकिन घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और बाद की जांच ने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी। पुलिस का दावा है कि यह एक सुनियोजित हत्या पुलिस का दावा—महीनों पहले रची गई थी साजिश
पुलिस के अनुसार सिया गोयल अपने कथित प्रेमी चेतन चौधरी के साथ रिश्ते में थी और दोनों शादी करना चाहते थे। लेकिन सिया की सगाई केतन अग्रवाल से हो चुकी थी और इसी कारण दोनों ने कथित रूप से केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
जांच में सामने आया कि दोनों कई बार लोहागढ़ किले गए और घटना से पहले वहां कथित रूप से रिहर्सल भी की। पुलिस का दावा है कि हत्या के लिए तीन बार पहले भी प्रयास किए गए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। आखिरकार 18 जून को कथित योजना को अंजाम दिया गया। पुलिस के अनुसार घटना के दौरान सिया ने संकेत दिया, जिसके बाद चेतन ने केतन को खाई में धक्का दे दिया। इन सभी आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होना बाकी है।
एक करोड़ रुपये का एंगल
जांच में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, केतन अग्रवाल ने शादी की तैयारियों और खरीदारी के लिए सिया गोयल को लगभग *एक करोड़ रुपये* दिए थे। आरोप है कि यह राशि बाद में चेतन चौधरी को उसके कारोबार और भविष्य के लिए दे दी गई। पुलिस इस पहलू की वित्तीय दस्तावेजों के जरिए जांच कर रही है।
गायब पासपोर्ट और डिलीट डिजिटल डेटा
मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केतन अग्रवाल का गायब पासपोर्ट और डिलीट किया गया डिजिटल डेटा है। जांच एजेंसी का कहना है कि मोबाइल फोन, चैट, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की फोरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या किसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को जानबूझकर नष्ट किया गया।
पुलिस ने जुटाए कई वैज्ञानिक साक्ष्य
पिछले कुछ दिनों में पुलिस दोनों आरोपियों को कई स्थानों पर लेकर गई। लोहागढ़ किले पर क्राइम सीन दोबारा तैयार किया गया। सिया के घर से घटना वाले दिन पहने गए कपड़े और अन्य सामान जब्त किए गए। पुलिस ने चेतन के वाहन और अन्य वस्तुओं की भी जांच की। इसके अलावा गेट एनालिसिस, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से साक्ष्य जुटाए जासके
सरकार भी हुई सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री *देवेंद्र फडणवीस* ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के निर्देश दिए। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता *उज्ज्वल निकम* को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया, ताकि मुकदमे की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ सके।
अब आगे क्या?
आज की सुनवाई के बाद पूरे मामले की नजर अदालत के अगले आदेश पर टिकी हुई है। यदि पुलिस को आगे की हिरासत और पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति मिलती है तो जांच एजेंसी को कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे अपने आप में अदालत में अंतिम साक्ष्य नहीं होते, बल्कि जांच में मदद करने वाला वैज्ञानिक माध्यम माने जाते हैं।
फिलहाल केतन अग्रवाल हत्याकांड देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो चुका है। हर नई सुनवाई के साथ नए तथ्य सामने आ रहे हैं, लेकिन अंतिम सच का फैसला अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
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