नयी दिल्ली 03-10-2017,सुनील कुमार ,वी एन आई
भारत में बिलियर्डस और स्नूकर जैसे कौतूहल जगाने वाले खेल बहुत कम हुये हैं। अंधेरे कमरे, बेहतरीन कपड़े पहने खिलाड़ी और कुछ वर्ष पूर्व तक 18 की उम्र के नीचे वालों का प्रवेश निषेध करते सूचना पट्ट, सभी बिलियर्ड्स और स्नूकर को रहस्यमय बनाते थे, जिससे कई युवा इस खेल की ओर आकर्षित हुए। इनमें से एक चार बार के पेशेवर बिलियर्ड्स के विश्व विजेता गीत सेठी थे। 1981 में वह सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय विजेता बने। उन्हें शौक़िया खिलाड़ियों का विश्व ख़िताब 1984 में मिला। सेठी की सफलता उसी महान भारतीय बिलियर्ड्स परंपरा की कड़ी थी, जो 1958 में उस समय सुर्खियों में आई थी, जब विल्सन जोन्स ने शौक़िया खिलाड़िया का विश्व खिताब जीता। जोन्स द्वारा स्थापित प्रतिमान के बाद, माइकल फ़रेरा ने पुराने और नए दौर के बीच सेतु का काम किया। फ़रेरा ने अपना पहला शौक़िया ख़िताब 1977 में जीता और 1983 तक दो बार और जीतकर अंग्रेज़ों के वर्चस्व को गंभीर चुनौती दी, जिन्होंने 19वीं शाताब्दी में खेल का भारतीय उपमहाद्वीप में परिचय कराया था। फ़रेरा उन बहुत से खिलाड़ियों की पीढ़ी के थे, जो अच्छा बिलियर्ड्स खेलते थे और प्रतिद्वंद्वियों को निश्चित ही कठिन चुनौती देते थे। इस पीढ़ी और भी खिलाडी शामिल थे। गीत सेठी द्वारा फ़रेरा के नक़्शे क़दम पर चलने से, 1980 व 1990 के दशक ने निश्चित ही भारतीय बिलियर्ड्स का स्वर्णिम युग देखा। सेठी ने 1986 में एक और शौक़िया ख़िताब जीता और 1990 के दशक में चार पेशेवर विश्व ख़िताब जीते, जिनमें से अंतिम 1998 में जीता गया। शौक़िया बिलियर्ड्स में भारत के कीर्तिमानों में एक और प्रतिष्ठापूर्ण अध्याय 1990 में तब जुड़ा मनोज कोठारी 'आर्थर वॉकर ट्राफ़ी' जीतने वाले चौथे भारतीय बने। जब 1988 में बैंकाक के एशियाई खेलों में ये खेल शामिल किये गए, तब अशोक शांडिल्य ने भारत के लिये स्वर्ण पदक जीते। शांडिल्य ने सेठी के साथ मिलकर युगल स्पर्द्धा जीती और फ़ाइनल में सेठी को हराकर स्वर्ण पदक जीता। कई होनहार खिलाडी आज बिलियर्ड्स में भारत की मशाल थामे हुए हैं । ओम अग्रवाल ने स्नूकर में शौक़िया विश्व प्रतियोगिता 1984 में जीती। यासिन मर्चेंट 1989 में एशियाई प्रतियोगिता जीतकर विश्व स्नूकर में अपना मुक़ाम बनाने वाले एकमात्र अन्य भारतीय बने। क्यू खेल भारत के युवाओं में तेज़ी से लोकप्रिय होते जा रहे हैं। पूल और कैरम आजकल युवाओं को बहुत आकर्षित कर रहे हैं, जो हर क्षेत्र में बढ़ते पूल पार्लरों के कारण सुलभ भी होते जा रहे हैं।
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