नई दिल्ली/ लेह,4 सितंबर ( वी एन आई)पूर्वी लद्दाख में गत 30 अगस्त को भारतीय सैनिकों द्वारा चीनी जवानों को पीछे खदेड़ कर भारत ने कई ऊंचाई के इलाकों पर कब्जा जमा लिया था, उसके बाद से इलाके में बौखलायें चीनी सेना के अस्त्र-शस्त्र की मौजूदगी काफी बढ़ी हुई दिख रही है
पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी टैंकों और पैदल सैनिकों की बढ़ी हुई मौजूदगी देखी गई है. अगर चीनी तोपों की रेंज देखें तो अनुमान है कि चीनी तोपखाने वास्तविक नियंत्रण रेखा से 20 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर अंदरूनी हिस्सों में पोजीशन लिए हुए हो सकते हैं.
सूत्रों के अनुसार दक्षिणी पैंगॉन्ग में चीन के सीमा के अंदर आने वाले मोल्डो से कुछ ही दूरी पर अतिरिक्त टैंक बलों की मौजूदगी देखी गई है. हालांकि, चीनी सेना की गतिविधियों पर भारतीय सेना की नजर हैं, क्योंकि उसका थाकुंग से लेकर मुकपुरी के पार तक की चोटियों पर मौजूदगी है. इसमें स्पानगूर दर्रे की दो चोटियां भी शामिल हैं. बहुत ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा दो किलोमीटर चौड़ा है, जिसपर आसाानी से टैंकों की गतिविधियां की जा सकती हैं.
भारतीय सेना ने अपने इलाके में अपनी टैंकों की पोजिशनिंग भी बढ़ाई है और अतिरिक्त बलों को तैनात किया है, ताकि वास्तविक नियंत्रण रेखा के ऊंचाइयों वाले इलाके में उसकी मौजूदी और मजबूत हो सके. चोटियों पर अपनी स्थिति मजबूत करके भारतीय सेना चीनी सेना की कवच और उसके जवानों की टुकड़ियों को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, रॉकेट और दूसरे हथियारों से जवाब देने में सक्षम है.
आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने आज कहा 'सीमा पर हालात नाजुक है. सुरक्षा के मद्देनजर कदम उठाए गए हैं. समस्या का हल बातचीत से हो सकता है.'वी एन आई
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