भारत को उम्मीद, इसी वर्ष मिल सकती है एनएसजी की सदस्यता-सुषमा

By Shobhna Jain | Posted on 19th Jun 2016 | VNI स्पेशल
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नयी दिल्ली,19 जून (शोभनाजैन/वीएनआई)विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उम्मीद जताई है कि भारत को इसी वर्ष परमाणु आपूर्तिकर्ता देशो के 48 सदस्यीय विशिष्ट समूह- एनएसजी की सदस्यता मिल जायेगी,साथ ही उन्होने उम्मीद जताई कि भारत समूह मे सदस्यता पाने को लेकर चीन को भी मना लेंगा. उन्होने आज यहा एक प्रेस कॉफ्रेंस मे सवालो के जबाव मे कहा कि चीन एनएसजी की सदस्यता को लेकर भारत का विरोध नहीं कर रहा, यह सिर्फ प्रक्रिया के मानदंडों की बात कर रहा है.उन्होने कहा भारत इस मुद्दे पर इस समूह के सदस्य देशो से संपर्क कर रहा है, स्वयं उन्होने 23 देशो के प्रतिनिधियो से इस बाबत चर्चा की है, एक दो देशो ने इस पर अपनी कुछ जिग्यासाये आपतियॉ व्यक्त् की है. श्रीमति स्वराज ने कहा ' इस मुद्दे पर सभी देशो के साथ बातचीत कर सर्वसम्मति कायम करने की कौशिश की जा रही है.उन्हे भरोसा है कि सर्वसम्मति कायम हो जाने पर कोई देश इसे तोड़ेगा नही. गौरतलब है कि हाल ही मे वियना मे एन एस जी जी देशो की बैठक मे चीन ने भारत की सदस्यता के आवेदन का विरोध किया था ,उसने तुर्की सहित छह देशो के साथ मिल कर भारत के खिलाफ लामबंदी की.दो दिन पूर्व ही 16-17 जून को विदेश सचिव एस जयशंकर् ने अचानक चीन् का दौरा कर इस मसले पर भारत के प्रति समर्थन जुटाने की कौशिश की.चीन द्वारा पाकिस्तान को भी एन एस जी का सदस्य बनाये जाने पर जोर दिये जाने के सवालो के जबाव मे श्रीमति स्वराज ने कहा कि भारत इस समूह का सदस्य नही है ऐसे मे वह किसी देश की सदस्यता के आवेदन पर कोई टिप्पणी नही कर सकता है, लेकिन भारत वह इस किसी की सदस्यता का विरोध नही करता है लेकिन उसका कहना है कि प्रक्रिया की बजाय उस देश का परमाणु ट्रेक रिकॉर्ड देखा जाये. वर्ष 2008 मे भारत को एन एस जी से जो छूट मिली, भारत ने न/न् केवल प्रतिबद्धताओ का पालन किया बल्कि उससे आगे बढ कर काम किया.उन्होने कहा कि भारत की उर्जा आवशयकताओके लिये परमाणु उर्जा अहम है.गौरतलब है कि चीन का जाहिराना विरोध इस बात को ले कर है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि एन पी टी पर हस्ताक्षर नही किये इसलिये उसे एन एस जी का सदस्य नही बना्या जाये एन एस जी की सदस्यता केलिये सर्व सम्मति होना जरूरी है.एक भी सदस्य देश का विरोध होने पर इसकी सदस्यता नही मिल सकतीहै. अमरीका, इंगलेंड,रूस सभी ने इसमे भारत की सदस्यत्ता का समर्थन कियाहै.अमरीका ने इसके सदस्य देशो से भारत का समर्थन करने की अपील कीहै.एन एस जी सदस्य देशो की आगामी २३ जून को सोल मे बैठक हो रही है जिसमे भारत की सदस्यता के मुद्दे पर आगे विचार किया जायेगा. दो दिन पूर्व ही चीन के सरकारी ‘ग्लोबल टाइम्स' ने भारत की सदस्यता का विरोध करते हुए लिखा था कि नयी दिल्ली को इस विशिष्ट परमाणु समूह में प्रवेश दिये जाने से भारत और पाकिस्तान के बीच का ‘परमाणु संतुलन' बिगड़ जायेगा.इस लेख में कहा गया कि एनएसजी में भारत का प्रवेश ‘‘दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ देगा और साथ ही इससे पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता पर संकट के बादल मंडराने लगेंगे.' हालांकि साथ ही इस लेख में यह भी कहा गया कि चीन 48 सदस्यों वाले परमाणु क्लब में भारत को शामिल किये जाने का स्वागत कर सकता है बशर्ते यह ‘‘नियमों के साथ हो. श्रीमति सुषमा स्वराज ने सरकार के दो साल पूरे होने पर इस प्रेस कांफ्रेस को संबोधित किया. सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्रालय के दो साल का कामकाज का ब्यौरा दिया है. विदेश मंत्री ने भारत-पाक रिश्ते, एनएसजी से लेकर विजय माल्या तक तमाम मुद्दों पर मीडिया के सवालों का जवाब दिया. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाक को लेकर पूछे गए सवाल पर दो टूक शब्दो मे कहा कि आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं चलेंगे. भारत मुद्दे सुलझाने से पहले संबंध बनाना जरूरी मानता है.्लेकिन साथ ही संबंध बनाने का मतलब यह नहीं है कि हम सतर्कता में कमी लाएंगे, हम सतर्क रहेंगे लेकिन मुद्दे सुलझाने से पहले रिश्ते बनाना जरूरी है. पाक से संबंध को लेकर हमने तीन सूत्री नीति बनाई है और उसी पर काम कर रहे हैं.पहला हर मुद्दे वार्ता से हल हों, हर वार्ता के दो पक्षकार (भारत-पाक) होंगे, तीसरा आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं चलेंगे. पाकिस्तान ने एनआईए के दौरे का प्रस्ताव खारिज नहीं किया है, कुछ और समय मांगा है.उन्होने कहा कि अमेरिका से रिश्ते बेहतर हुए हैं लेकिन हमने पुराने दोस्तों को भुलाया नहीं है, रूस और चीन के साथ हमारी वैसी ही दोस्ती है. सुषमा स्वराज ने कहा कि विदेश मंत्रालय की उपलब्धि की बात करूं तो दो सालों में 55 अरब डॉलर की एफडीआई आयी है. पिछले साल 140 देशों के साथ वार्ता हुई है. विश्व में ऐसे 65 देश हैं जहां भारत से कोई मंत्री नहीं गया है. हमने यह तय कि हम सभी देशों तक पहुंचेंगे जिसमें सभी राज्यों और कैबिनेट मंत्रियों से मदद लेंगे. 4 देशों के साथ 12 स्मार्ट सिटी बनाने का समझौता हुआ है.वी एन आई

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