कोलकाता, 06 जुलाई, (वीएनआई) नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने बीते शुक्रवार को कहा कि ‘मां दुर्गा’ के जयकारे की तरह ‘जय श्रीराम’ का नारा बंगाली संस्कृति से नहीं जुड़ा है और इसका इस्तेमाल ‘लोगों को पीटने के बहाने’ के तौर पर किया जाता है।
जादवपुर विश्वविद्यालय में अमर्त्य सेन ने कहा कि ‘मां दुर्गा’ बंगालियों के जीवन में सर्वव्याप्त हैं। उन्होंने आगे कहा, 'आज कल राम नवमी ‘लोकप्रियता हासिल’कर रही है कुछ समय पहले तक पहले इसके बारे में सुना तक नहीं था। अमर्त्य सेन ने कहा मैंने अपनी चार साल की पोती से पूछा कि उसके पसंदीदा भगवान कौन है? उसने जवाब दिया कि मां दुर्गा। मां दुर्गा हमारी जिंदगी में मौजूद हैं। उन्होंने आगे गरीबी पर बोलते हुए कहा केवल गरीबों की आय बढ़ने से उनकी समस्याएं समाप्त नहीं हो जातीं। बेसिक हेल्थ केयर, सही शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के जरिए गरीबी कम की जा सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा अमर्त्य सेन शायद बंगाल के बारे में नहीं जानते। क्या उन्हें बंगाली और भारतीय संस्कृति की जानकारी है ?
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