एटलांटा, अमरीका, 04 जुलाई(शोभना जैन,वीएनआई) जैन मुनि आचार्य लोकेश ने कहा कि युद्ध , हिंसा और आतंकवाद किसी समस्या का समाधान नहीं हिंसा् ,तो प्रतिहिंसा को ही जन्म देती है| संवाद के माध्यम से भगवन महावीर द्वारा प्रतिपादित अहिंसात्मक मार्ग से अहिंसात्मक शैली में हर आपसी विवाद को सुलझाया जा सकता है| आचार्य लोकेश यहा जैना कन्वेंशन 2015 को संबोधित कर रहे थे.आचार्य लोकेश ने कहा कि अनेकता मे एकता के मूल मंत्र पर आधारित जैन धर्म एक वैज्ञानिक धर्म है| यह स्वस्थ, सुखी व स्वास्थय जीवन का आधार है| पानी छान कर पीना यानि स्वच्छ पानी और सुर्यास्त से पहले भोजन करना आदि जैन धर्म के सिद्धांत अब स्वास्थय व वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्रतिपादित हो चुके है. जैन धर्म के अनेकता मे एकता के सिद्धांत की चर्चा करते हुए उन्होने कहा समाजिक सदभाव और विश्व व्यापी प्रगति का यह आधार है. उन्होनेकहा कि जरूरी है कि अमेरिका की तरह भारत सहित दुनिया भर मे ्जैन धर्म के सभी सम्प्रदायों को आपस मे मिल कर एक मंच पर आकर जैन धर्म को विशेष तौर पर अगली पीढ़ी के सामने वैज्ञानिक रूप में प्रस्तुत करने के अभियान मेजुट जाये|ुन्होने कहा कि जैन आगमों में अथाह ज्ञान व वैज्ञानिक तथ्य प्राकृत भाषा में लिखे हुए है जिसके बारे में लोगो को नहीं पता| वैज्ञानिकों की एक टीम को आगमों पर शोध कर नई खोजे विश्व कल्याण के लिए लोगों के सामने समकालीन भाषा में प्रस्तुत करनी चाहिये| इससे भगवन महावीर का जैन दर्शन मानवता के लिए अधिक प्रासंगिक व उपयोगी बनेगा|फेडरेशन ऑफ जैन एशोशियेशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका\'जैना\' द्वारा आयोजित इस द्विवार्षिक सम्मेलन मे अमरीका, कनाडा, इंगलेंड सहित अनेक देशो व भारत के जैन प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे है.गत दो जुलाई से शुरू हुआ और कल यानि पॉच जुलाई तक चलने वाले इस सम्मेलन मे जैन धर्म दर्शन से जुड़ी विभिन्न अध्य्यन पत्रो, शोध पत्रो, धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमो व साधु संतो के प्रवचन हो रहे है.सम्मेलन मे आचार्य चंदना जी, आचार्य रूपचंद जी, आचार्य अमरेन्द्र मुनि, समन श्रुतप्रग्य जी, समन परिमल प्रज्ञ जी, मानक मुनि जी, भट्टारक क्जरुकिरती जी चंद्रसेन जी जैसे साधु वृंद संबोधित कर रहे है|
इस बार के जैना सम्मेलन का विषय जैना कन्वेंशन 2015 \'जैन धर्म दर्शन- एक अहिंसक विश्व की राह\' विषय पर हो रही व्यापक चर्चा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह चर्चा वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए मील का पत्थर साबित होगी| यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है विश्व के अनेक भागों में सांप्रदायिक तथा जातीय उन्माद से उत्पन्न युद्ध, हिंसा व आतंकवाद ने विश्व को भयाक्रांत कर रखा है |
आचार्य लोकेश ने कहा कि \'जैना\' नार्थ अमेरिका में 69 सेंटरों के माध्यम से जैन दर्शन को सभी तक पहुंचाने काम कर रहा है इसके मानवतावादी कार्यों के कारण अमेरिका में जैन समाज की आवाज संयुक्त राष्ट्र संघ व व्हाईट हाऊस तक सु्नाई देती है| उन्होंने कहा कि प्रसन्नता की बात यह है कि पश्चिमी देशों में चरम भौतिक विकास तथा उसके चकाचौंध के माहौल में रहने तथा अत्यंत व्यस्त जीवन शैली के बावजूद भी आप सभी धार्मिक, सामाजिक, अध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए एकजूट होकर कार्य कर रहें है यह भारत सहित सभी के लिए प्रेरक है|वी एन आई