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Home >> अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की मौलिक विशेषता, सर्वधर्म सदभाव इसका मूल मन्त्र-सुषमा

अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की मौलिक विशेषता, सर्वधर्म सदभाव इसका मूल मन्त्र-सुषमा


Vniindia.com | Wednesday July 15, 2015, 02:22:20 | Visits: 2057







नई दिल्ली 15 जुलाई (शोभनाजैन,वीएनआई) विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने अनेकता में एकता को भारतीय संस्कृति की मौलिक विशेषता बताते हुए कहा है \'सर्वधर्म सदभाव\' इसका मूल मन्त्र है |श्रीमती सुषमा स्वराज ने यह भी कहा \' हिंसा और आतंक किसी समस्या का समाधान नहीं है | संवाद के द्वारा अहिंसा के मार्ग से हर समस्या को सुलझाया जा सकता है | उन्होंने कहा अहिंसा और शांति ही वह श्रेष्ठ मार्ग है जिससे हम दुनिया को बेहतर बना सकते है |\'

श्रीमति स्वराज आज यहा अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डा. लोकेश मुनि के नेतृत्व् मे मिलने आये एक शिष्टमंडल को संबोधित कर रही थी. संस्था के एक प्रवक्ता के अनुसार अमेरिका की सफल शांति सदभाव यात्रा से स्वदेश लौटने पर आज यहा उन्हे शुभकामनाये देते हुए श्रीमति स्वराज ने कहा कि आचार्य डा. लोकेश मुनि ने इस शांति सदभाव यात्रा से भारत की अहिंसा व शांति की महान संस्कृति को विश्व में पहुँचाने का भागीरथ प्रयत्न किया है|शांति यात्रा के दौरान आचार्य लोकेश मुनि ने संयुक्त राष्ट्र संघ में गत 21 जून को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह में भी हिस्सा लिया जहा उन्होने भारतीय योग की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि हर्ष की बात है कि भारतीय योग तेजी से दुनिया भर मे उसे अपना्या जा रहा है, यह दुनिया को एक सूत्र मे पिरो रहा है |आचार्य लोकेश नें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन से भारत की योग की प्राचीन महान विरासत को जन जन तक पहुँचाने में बल मिलेगा. गौरतलब है कि यू एन मे आयोजित इस समारोह मे श्रीमति स्वराज मुख्य अतिथी थी,इसमे यू एन के महासचिव बान की मून सहित अनेक धर्म गुरू और विशिष्ट जन भी मौजूद थे. श्रीमति स्वराज ने इस समारोह मे भारतीय योग को सॉफ्ट पॉवर बताते हुए कहा था कि जनकल्याण कारी भारतीय योग दुनिया को जोड़ रहा रहा है.प्रवक्ता के अनुसार आज श्रीमति स्वराज ने आचार्य लोकेश के अहिंसात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्व शांति व सदभाव का मार्ग प्रशस्त करने में संतों की अहम् भूमिका है|
अमरीका शांति यात्रा के दौरान लोकेश मुनि जी ने अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की संभावित उम्मीदवार व पूर्व विदेश मंत्री श्रीमती हिलेरी क्लिंटन के साथ आयोजित कार्यक्रम में अहिंसा प्रशिक्षण एवं पीस एजुकेशन कार्यक्रम को प्रस्तुत कर अहिंसा की मह्त्ता को पुन: उजागर किया |्मुनिश्री ने यह भी बताया की उनकी श्रीमती हिलेरी क्लिंटन के साथ भेंट के दौरान श्रीमती क्लिंटन नें भारत को विश्व में तेजी से उभरती हुई आर्थिक ताकत ्बताते हुए कहा कि आने वाले समय में उसकी विश्व पटल पर बड़ी भूमिका होगी|
आचार्य डा. लोकेश मुनि ने कहा कि हिंसा और आतंकवाद से केवल भारत ही नहीं अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश भी प्रभावित है| भारत का अहिंसा का प्रवर्तक रहा है अहिंसा व शांति का संदेश वाहक रहा है, दुनिया को आज इस रास्ते पर चलने की सब से ज़्यादा जरूरत है | वी एन आई



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